Patna: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद सभागार में जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अन्तर्गत ‘बिरसा लिब्स इन न्यू भारत’ थीम के तहत प्रवेशिकोत्तर छात्रवृति के लाभुकों के साथ संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत-समृद्ध बिहार की कल्पना के साथ ‘बिरसा लिब्स इन न्यू भारत’ थीम के अन्तर्गत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति योजना का आज शुभारंभ किया गया है. यह अपने आप में ऐतिहासिक है. यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है जिसकी शुरूआत पिछले वर्ष 15 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था. देश की आजादी और आदिवासी समाज के उत्थान में भगवान बिरसा मुंडा का बड़ा योगदान रहा है. आदिवासी समाज के नायक जिन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान के लिये संघर्ष किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के बंटवारे के बाद झारखण्ड राज्य की स्थापना हुई और बिहार का हरित आवरण क्षेत्र 8 से 9 प्रतिशत ही शेष रह गया. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वन क्षेत्र के आच्छादन में वृद्धि के लिये काम किया और राज्य का वन क्षेत्र 15 प्रतिशत हो गया. हमलोगों का लक्ष्य इसे 17 प्रतिशत करने का है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान बिरसा मुंडा को याद कर अनुसूचित जनजाति समाज के छात्र-छात्राओं को मुख्य धारा में लाने के लिये काम कर रहे हैं. जमीनी स्तर पर भी उसके लिये काम किया जा रहा है. केन्द्र सरकार द्वारा बिहार में एकलव्य स्कूलों की स्थापना की गयी है जिसमें बिहार बोर्ड के साथ सीबीएसई बोर्ड के सिलेबस की पढ़ायी करायी जायेगी जिससे अनुसूचित जनजाति समाज के बच्चे आगे बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति के तहत लगभग 1 लाख 4 हजार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है जिसमें 4 हजार 155 अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्रा हैं. प्री-मैट्रिक छात्रवृति के तहत इस वर्ष 20 लाख 46 हजार छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है, जिसमें 1 लाख 41 हजार अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्रा हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में भी आदिवासी समाज के लोगों की आबादी करीब 20 हजार है. आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिये हमलोग काम कर रहे हैं. प्रत्येक प्रखण्ड में मॉडल स्कूल खोला जा रहा है. जुलाई महीने में डिग्री कॉलेज की शुरूआत करने जा रहे हैं. जीवन में सफलता के लिये ज्ञानार्जन जरूरी है. अनुसूचित जनजाति के लिये थरूहट विकास योजना के तहत पश्चिम चम्पारण में 180 करोड़ रूपये के विकास कार्य कराये गये हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में मैराथन का आयोजन होगा. इसमें प्रथम विजेता को 1 लाख, द्वितीय विजेता को 75 हजार एवं तृतीय विजेता को 50 हजार रूपये का इनाम मिलेगा. कैमूर के अधौरा में जहां आदिवासी समाज के लोग संघर्ष का जीवन जी रहे हैं, वहां भी डिग्री कॉलेज खोला जायेगा. वाल्मीकिनगर तथा कैमूर में हेलीपोर्ट बनाये जायेंगे, इससे इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. आदिवासी समाज के बीच पर्यटकों के लिये होम स्टे को बढ़ावा दिया जायेगा, इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोग आदिवासी संस्कृति को भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे. आदिवासी समाज की उन्नति एवं समृद्धि के लिये हमलोग काम कर रहे हैं. यहां उपस्थित छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की हम कामना करते हैं.

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ० गोपाल सिंह, शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव संदीप कुमार आर० पुडुकलकट्टी सहित अन्य वरीय अधिकारी एवं विद्यार्थीगण उपस्थित थे.

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