Patna: बिहार में जन्म और मृत्यु पंजीकरण को सार्वभौमिक और समयबद्ध बनाने के लिए बड़ी पहल शुरू हुई है. योजना एवं विकास विभाग ने यूनिसेफ और यूएनईएससीएपी के सहयोग से पटना में “CRVS प्रणाली में सुधार” पर कार्यशाला आयोजित की. इसमें मूल्यांकन रिपोर्ट, नीति संक्षेपिका और जन-जागरूकता सामग्री जारी की गई.

मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, सरकारी सेवाओं और अधिकारों तक पहुंच का माध्यम है. उन्होंने स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करने और परिवारों तक पहुंचकर जागरूकता बढ़ाने का निर्देश दिया. सूचना पट्टों और स्थानीय माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया.

अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि CRVS के दो उद्देश्य हैं सही समय पर विश्वसनीय आंकड़ों का संकलन और नीति-निर्माण में उनका उपयोग. प्रवासी और वंचित परिवारों में जागरूकता की कमी दूर करनी है. नुक्कड़ नाटक, पंपलेट, सामुदायिक अभियान से जागरूकता फैलाई जाएगी. विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि बिहार में 90% जन्म स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं. इससे जन्म पंजीकरण मजबूत करने का मौका मिला है. गैर-संस्थागत जन्मों के लिए भी नियमों का पालन जरूरी है.

यूएनईएससीएपी की डॉ. क्लोई मर्सिडीज हार्वे और यूनिसेफ बिहार के डॉ. अभय कुमार ने रिपोर्ट के निष्कर्ष रखे. राज्य-जिला अधिकारियों ने CRVS मजबूत करने पर मंथन किया.

AAR रिपोर्ट में क्या

रिपोर्ट में सेवा वितरण, संस्थागत क्षमता, जन-जागरूकता और पहुंच की चुनौतियों की पहचान की गई है. सिस्टम को नागरिक-केंद्रित, दक्ष और उत्तरदायी बनाने की सिफारिशें हैं. जन्म-मृत्यु का सार्वभौमिक और समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित करना लक्ष्य है. रिपोर्ट के निष्कर्षों से मानकीकृत कार्य संचालन प्रक्रिया SOP बनेगी. इससे सेवा वितरण सुधरेगा, पंजीकरण कवरेज बढ़ेगा और नीति-निर्माण में डेटा का बेहतर उपयोग होगा.

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