Patna: राज्य सरकार ने सामूहिक अवकाश और सरकारी कार्यक्रमों से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले 69 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के उप सचिव संजय कुमार सिंह ने संबंधित परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों के पास पत्र भेजकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन अधिकारियों द्वारा लिया गया सामूहिक अवकाश अवैध घोषित किया जा चुका है और इसे डाईस नॉन माना गया है, यानी इस अवधि को सेवा में नहीं गिना जाएगा. संबंधित अधिकारियों पर आरोप है कि 25 मार्च 2026 की शाम 5 बजे तक उन सभी ने अपने-अपने पदों पर योगदान नहीं दिया है.
पत्र में कहा गया है कि यह आचरण न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का भी उल्लंघन है. ऐसे में संबंधित अधिकारियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए. सख्त चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि 13 अप्रैल 2026 तक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि अधिकारियों को इस विषय में कुछ नहीं कहना है, और उनके विरुद्ध एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
24 जिलों में तैनात परीक्ष्यमान अधिकारियों में सबसे अधिक गयाजी, रोहतास और मधुबनी जिले के
स्पष्टीकरण मांगने की यह कार्रवाई राज्य के 24 जिलों में तैनात परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों पर की गई है. इनमें गयाजी जिले में आठ, रोहतास जिले में सात और मधुबनी जिले के पांच राजस्व अधिकारी शामिल हैं. इसके अलावा बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मधेपुरा, पूर्वी चंपारण, वैशाली और जमुई जिलों में तैनात चार-चार, सिवान, सीतामढ़ी और नालंदा जिलों में तैनात तीन-तीन तथा औरंगाबाद जिले में तैनात दो अधिकारी शामिल हैं. पटना सहित किशनगंज, खगड़िया, पूर्णिया, सुपौल, नवादा, अररिया, अरवल और लखीसराय जिलों में तैनात एक–एक अधिकारी भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं.
