Ranchi: 2026 के बाद प्रस्तावित लोकसभा-विधानसभा परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज ने मोर्चा खोल दिया है. रविवार को रांची प्रेस क्लब में हुए सेमिनार में साफ चेतावनी दी गई कि ST आरक्षित सीटों में कटौती का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं होगा. पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन केवल सीटों का पुनर्गठन नहीं, आदिवासी राजनीतिक अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है.

क्या है चिंता

2001 की जनगणना के आधार पर 2002 में परिसीमन आयोग ने झारखंड में ST आरक्षित विधानसभा सीटें 28 से घटाकर 22 और लोकसभा सीटें 5 से 4 करने का प्रस्ताव दिया था. व्यापक आंदोलन के बाद 2008 में कानून में संशोधन कर 2026 तक यथास्थिति रखी गई. अब 2026 के बाद फिर उसी खतरे की आशंका जताई जा रही है.

बंधु तिर्की बोले- विरोध करेंगे

झारखंड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने कहा कि अनुसूचित जनजातियों के लिए सुरक्षित सीटों में कटौती का पुरजोर लोकतांत्रिक विरोध होगा. संविधान में ST के लिए विशेष प्रावधान हैं. कांग्रेस समेत सभी धर्मनिरपेक्ष दल ऐसे किसी प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे.

क्यों है खतरा

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी बहुल इलाकों में कम जनसंख्या वृद्धि, पलायन, विस्थापन और भौगोलिक कारणों से जनसंख्या आंकड़े प्रभावित होते हैं. शहरी-गैर आदिवासी इलाकों में जनसंख्या ज्यादा बढ़ी है. केवल जनसंख्या को आधार बनाने से आदिवासी प्रतिनिधित्व घट सकता है. लोकतंत्र का मतलब सिर्फ संख्या नहीं, वंचित समुदायों की भागीदारी भी है.

पांचवीं अनुसूची का हवाला

वक्ताओं ने कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र आदिवासी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवन के केंद्र हैं. परिसीमन में इनकी भौगोलिक-सामाजिक एकता खंडित हुई तो स्थानीय नेतृत्व और सामुदायिक संरचना प्रभावित होगी. अनुच्छेद 330, 332 और पांचवीं अनुसूची की भावना का पालन जरूरी है.

सेमिनार की 5 बड़ी मांगें

ST आरक्षित विधानसभा-लोकसभा सीटों में कटौती स्वीकार नहीं

सीटें बढ़ें तो ST आरक्षित सीटें भी समानुपातिक बढ़ें

पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की एकता सुरक्षित रखकर परिसीमन हो

संवैधानिक विशेषज्ञों, ST आयोग, सांसद-विधायक वाली उच्चस्तरीय राष्ट्रीय समिति बने

संसद ऐसी व्यवस्था करे कि भविष्य में ST प्रतिनिधित्व कम न हो

4 बड़े फैसले 

ड्राफ्टिंग कमेटी: परिसीमन पर रिपोर्ट बनाकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष समेत मंचों पर बात रखेगी

महाजुटान रैली: 2 अगस्त 2026 को रांची में “आदिवासी एकता महाजुटान रैली”। तैयारी समिति में ग्लैडसन डुंगडुंग, शशि पन्ना, अनिल अमिताभ पन्ना

रणनीति समिति: दयामनी बारला और वासवी किड़ो दीर्घकालिक-अल्पकालिक रणनीति बनाएंगी

सर्वदलीय बैठक: 17 जून 2026 को रांची में सभी दलों की बैठक। दिल्ली में भी बैठक होगी, जिम्मेदारी सांसद सुखदेव भगत और कालीचरण मुंडा को

कौन-कौन थे मौजूद

पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, सांसद सुखदेव भगत, पूर्व मेयर रमा खलखो, दयामनी बारला, वासवी किड़ो, ग्लैडसन डुंगडुंग, शशि पन्ना, अनिल अमिताभ पन्ना, अधिवक्ता सुभाशीष सोरेन, प्रो. रामचंद्र उरांव समेत कई सामाजिक-राजनीतिक हस्तियां.

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