Patna: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन और बेबुनियाद बताया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में SIR की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई. पात्र मतदाताओं के नाम हटाने का कोई मामला सामने नहीं आया है और जिन लोगों को किसी तरह की आपत्ति थी, उनके लिए दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया उपलब्ध थी. निर्वाचन आयोग ने भी SIR के दौरान पात्र मतदाता के नाम छूटने पर दावा और गलत नाम शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था बताई थी. मुख्यमंत्री रविवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि SIR के दौरान मतदाता सूची में शामिल नामों का सत्यापन किया गया. इस क्रम में मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए लोगों और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों की जांच की गई.
दावे-आपत्ति के लिए थी पूरी व्यवस्था
सम्राट चौधरी ने कहा कि जिन लोगों की पात्रता को लेकर कोई समस्या थी, उनके लिए दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध रही. निर्वाचन आयोग के अनुसार भी 2025 के बिहार SIR में पात्र नाम छूटने पर दावा और गलत नाम शामिल होने पर आपत्ति दाखिल करने का प्रावधान रखा गया था.
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2003 में भी बिहार में SIR कराया गया था और 2025 में दोबारा यह प्रक्रिया पूरी की गई. उनके अनुसार निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची को ऑनलाइन उपलब्ध कराया था, ताकि वर्तमान पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाता अपने पुराने विवरण का सत्यापन कर सकें.
आधार को पहचान के दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के दौरान निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर मतदाता विवरण का सत्यापन किया गया. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद आधार कार्ड को पहचान संबंधी दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया. सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि आधार पहचान स्थापित करने के लिए स्वीकार्य है, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है.
उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है या किसी वास्तविक शिकायत का मामला है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामने लाया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का उन्हें पूरा अधिकार है, लेकिन आरोप तथ्य और प्रमाण के साथ रखे जाने चाहिए.
निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका महत्वपूर्ण संस्थाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव संबंधी शिकायतों के लिए निर्वाचन आयोग के साथ न्यायिक व्यवस्था भी उपलब्ध है. लोकतंत्र में निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची एक गतिशील सूची है, जिसमें समय-समय पर नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं तथा मृत्यु, स्थानांतरण और अन्य कारणों से आवश्यक संशोधन किए जाते हैं.
विपक्ष को जनहित के मुद्दों पर जनता के बीच जाने की सलाह
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता मालिक है और जनता अपने मताधिकार के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है. उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएं और अपनी बात तथ्यपरक तरीके से रखें.
मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब और वंचित परिवारों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति तेज होने की बात भी कही और विपक्ष पर SIR को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया.
