Patna: बिहार में ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता बनाए रखने को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग ने सोमवार को सख्त निर्देश जारी किए हैं. किसी निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जीरो टॉलरेंस और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करने को लेकर सोमवार को ग्रामीण कार्य विभाग के सभागार में अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में प्रयोगशाला, प्रमंडल एवं अंचल स्तर की जांच एवं गुणवत्ता नियंत्रण इकाई के पदाधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न इस बैठक में निर्माण कार्यों की निरंतर निगरानी, आधुनिक गुणवत्ता परीक्षण और विभागीय जवाबदेही तय करने के निर्देश जारी किए गए हैं.

इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि सभी गुणवत्ता नियंत्रण पदाधिकारियों को हर महीने कम से कम 20 निर्माणाधीन पथों या पुलों की सघन जांच करना अनिवार्य होगा. पूर्ण पारदर्शिता के लिए अधिकारियों को कार्यस्थल की जियो-टैग तस्वीरों और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट के साथ एमआईएस पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य होगा. निगरानी तंत्र को अधिक सख्त करते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि रूटीन निरीक्षण की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर अपलोड करना होगा और जन शिकायतों की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर अनिवार्य रूप से मुख्यालय को समर्पित करना होगा. इसके साथ ही, पीक्यूसी कार्यों में कंक्रीट की मजबूती परखने के लिए ढलाई के समय ही कार्यस्थल से नमूना लेना आवश्यक होगा, जिसकी पूर्व सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी होगी. ग्रामीण कार्य विभाग का यह कदम राज्य में उच्च स्तरीय एवं टिकाऊ ग्रामीण सड़कों और पुलों का निर्माण सुनिश्चित करेगा.

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