Ranchi: राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र के जोरार स्थित आवास में अरगोड़ा अंचल के राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा (38) की हत्या मामले का पुलिस ने खुलासा किया है. जमीन के दाखिल-खारिज और नामांतरण में प्रतिकूल जांच रिपोर्ट दिए जाने से नाराज होकर उनकी हत्या की साजिश रची गई थी. इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप गोसाई, अमित टोप्पो उर्फ अमित गोसाई और सिंटु कुमार गोसाई के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, जमीन विवाद और नामांतरण से जुड़ी नाराजगी ही हत्या की मुख्य वजह बनी.
23 अक्टूबर की रात घर में घुसकर की गई हत्या
पुलिस के अनुसार, 24 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि अरगोड़ा अंचल में कार्यरत राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा की जोरार स्थित उनके आवास पर अज्ञात अपराधियों ने हत्या कर दी है. इस संबंध में नामकुम थाना (कांड संख्या 301/26) में मालमा दर्ज किया गया. पुलिस जांच में हत्या की वारदात 23 अक्टूबर की रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच होने की बात सामने आई है. मामले के उद्भेदन के लिए गठित एसआईटी ने छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनके अलावा अन्य अज्ञात अपराधियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है. फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.
जमीन के दाखिल-खारिज में प्रतिकूल रिपोर्ट बनी हत्या की वजह
एसएसपी रांची के निर्देश पर एसपी ग्रामीण के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई. तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने जांच की तो हत्या के पीछे जमीन का विवाद सामने आया. पुलिस के मुताबिक, अरगोड़ा अंचल के मौजा बड़ा घाघरा स्थित खाता संख्या-29 की 96 डिसमिल जमीन को गोसाई परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग डीड के माध्यम से बेचा था. इसके बाद जमीन की खरीद-बिक्री के आधार पर दाखिल-खारिज और नामांतरण के लिए अरगोड़ा अंचल में आवेदन दिए गए थे.
वंशावली में गड़बड़ी मिलने पर कर्मचारी ने दी थी प्रतिकूल रिपोर्ट
नामांतरण के विभिन्न मामलों में राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा ने स्थल जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया था. पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान जमीन के मूल दस्तावेजों और वंशावली में भिन्नता पाई गई थी. इसके बाद उन्होंने कई नामांतरण वादों में प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए अंचल अधिकारी को दाखिल-खारिज अस्वीकृत करने की अनुशंसा की थी. इसी आधार पर कुछ नामांतरण आवेदन खारिज कर दिए गए थे, जबकि कुछ मामले लंबित थे. इस वजह से गोसाई परिवार के लोग जमीन की बिक्री और दाखिल-खारिज नहीं करा पा रहे थे. वहीं, जमीन के खरीदारों की ओर से नामांतरण और दखल-कब्जा कराने का दबाव बनाया जा रहा था. इसी नाराजगी में आरोपियों ने राजस्व कर्मचारी की हत्या की योजना बनाई.
