Ranchi: ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को बड़ा इनाम जीतने का लालच देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के एक संगठित गिरोह का जमशेदपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है. रामगढ़ और जमशेदपुर साइबर पुलिस की संयुक्त टीम ने बिरसानगर थाना क्षेत्र के ओम नगर स्थित एक किराये के फ्लैट में छापेमारी कर पांच आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. मौके से 102 एटीएम/डेबिट कार्ड, 67 सिम कार्ड, 25 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप और नौ बैंक पासबुक समेत बड़ी संख्या में संदिग्ध सामान बरामद किए गए हैं. गिरफ्तार आरोपी में गोलमुरी थाना क्षेत्र के चर्च रोड के रहने वाले एम. भानु प्रकाश, टेल्को थाना क्षेत्र के बारीनगर के रहने वाले मो. फरहान, बिरसानगर थाना क्षेत्र के मदर टेरेसा रोड के रहने वाले राहुल मिंज, जोन नंबर-02 के रहने वाले अभिषेक राज और सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के श्रवण सोना का नाम शामिल है.
किराये के फ्लैट से चल रहा था ऑनलाइन ठगी का कारोबार
पुलिस के अनुसार, रामगढ़ साइबर अपराध थाना (कांड संख्या 05/2026) में दर्ज मामले के अनुसंधान के दौरान आरोपियों के जमशेदपुर के बिरसानगर इलाके में सक्रिय होने की सूचना मिली थी. इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर जमशेदपुर साइबर थाना, बिरसानगर थाना और रामगढ़ साइबर थाना की संयुक्त टीम गठित की गई. तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर टीम ने ड्रॅगरी टोला, ओम नगर, रोड नंबर-02 स्थित कामेश्वर राम के मकान के प्रथम तल पर किराये के फ्लैट में छापेमारी की. पुलिस के मुताबिक, वहां लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक कार्ड और सिम कार्ड के माध्यम से ऑनलाइन साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था. मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. छापेमारी के दौरान 102 एटीएम कार्ड, 25 मोबाइल, पांच लैपटॉप, तीन चार्जर, 67 सिम कार्ड, नौ बैंक पासबुक, 8,440 रुपये नकद, हिसाब-किताब की चार रजिस्टर/नोटबुक, एक जियो वाई-फाई राउटर, 15 मीटर लैन केबल,- छह मोबाइल चार्जर, एक यामाहा R15 बाइक (JH05CJ-7802), एक अन्य वाहन का ओनर कार्ड (JH05DP8099), दो ड्राइविंग लाइसेंस, दो पैन कार्ड और चार आधार कार्ड बरामद किया गया है.
GET&ID गेमिंग प्लेटफॉर्म से फंसाते थे लोगों को
जांच में सामने आया कि आरोपी GET&ID नामक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित करते थे. शुरुआत में कम पैसे लगाकर बड़ा इनाम जीतने का लालच दिया जाता था. जब खिलाड़ी पैसे हारने लगता था तो उसे भरोसा दिलाया जाता था कि अगली बार बड़ा दांव लगाकर वह अपना पिछला नुकसान वापस पा सकता है. इसी लालच में लोग लगातार पैसे लगाते जाते थे और लाखों रुपये गंवा बैठते थे. पुलिस के अनुसार, ठगी से प्राप्त रकम को फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था. इसके बाद एटीएम कार्ड के माध्यम से नकद निकासी कर ठगी की रकम को ठिकाने लगाया जाता था.
