Patna: CSP की आड़ में चल रहे फर्जी आधार कार्ड एवं फिंगरप्रिंट क्लोनिंग गिरोह का पर्दाफाश करते हुए वैशाली पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत तीन अपराधी को गिरफ्तार किया है. वही साइबर फ्रॉड से संबंधित दस्तावेजों एवं उपकरण भी बरामद किया है. गिरफ्तार आरोपी में वैशाली जिले के बेलसर थाना क्षेत्र के मनोरा निवासी राकेश कुमार, बेलसर निवासी विनोद कुमार और मुजफ्फरपुर जिले के हत्था थाना क्षेत्र के पटसारा निवासी मास्टरमाइंड धर्मेंद्र कुमार पंडित का नाम शामिल है.
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के क्रम में गुप्त सूचना के आधार पर बेलसर थाना क्षेत्र में CSP की आड़ में चल रहे फर्जी आधार कार्ड निर्माण एवं फिंगर प्रिंट क्लोनिंग गिरोह का सफलतापूर्वक खुलासा किया गया है इस गिरोह द्वारा ग्रामीणों के आधार डेटा एवं बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर साइबर फ्रॉड किया जा रहा था. वैशाली एसपी के निर्देशन में एसडीपीओ सदर 2 के नेतृत्व में साइबर अपराध करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया. गठित टीम कार्रवाई करते हुए बेलसर थाना के बिबीपुर चौक स्थित एयरटेल पेमेंट बैंक CSP आउटलेट पर छापेमारी किया. इस दौरान पाया गया कि CSP संचालक राकेश कुमार उक्त केंद्र पर फर्जी तरीके से आधार कार्ड निर्माण, फिंगर प्रिंट क्लोनिंग एवं बैंकिंग सेवाओं के नाम पर आम ग्रामीणों से धोखाधड़ी की जा रही थी. उससे पूछताछ के क्रम में यह भी बताया कि बेलसर स्थित एक अन्य साइबर कैफे में विनोद कुमार नामक व्यक्ति रहता है, जो इसी तरह तरह साइबर फ्रॉड का कार्य करता है. उसकी निशानदेही के आधार पर विनोद कुमार को बेलसर स्थित आर्यन कम्युनिकेशन कैफे से साइबर फ्रॉड संबंधित दस्तावेजों एवं उपकरण के साथ गिरफ्तार किया गया. दोनों से पूछताछ में पता चला कि गिरोह का मास्टरमाइंड मुजफ्फरपुर निवासी धर्मेंद्र कुमार पंडित है. पुलिस छापेमारी करते हुए मुजफ्फरपुर जिले के हत्था ओपी क्षेत्र में सूर्या एंटरप्राइजेज नामक दुकान से साइबर फ्रॉड के उपकरण एवं अन्य कई दस्तावेज के संग धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया. तथा धर्मेंद्र कुमार पंडित के द्वारा ही राकेश एवं विनोद को प्रशिक्षण दिया गया था, तथा इसक द्वारा लोगों के फिंगर प्रिंट लेकर उसका क्लोन तैयार किया जाता था और उसी के आधार पर फर्जी आधार कार्ड बनाकर विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था. इसके माध्यम से बैंक खात खोलना, पेंशन, सरकारी योजनाओं की राशि निकालना तथा अन्य साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं अंजाम दी जाती थीं. पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वे आपस में मिलकर फर्जी क्लोन फिंगर प्रिंट तैयार कर आधार कार्ड बनाते थे तथा साइबर फ्रॉड के लिए उसका उपयोग करते थे.
इन सामानो की हुई है बरामदगी
छापेमारी के दौरान मौके पर से तीन मिनी एटीएम मशीन, एक एटीएम स्वैप मशीन, चार फिंगर प्रिट मशीन, एक लोकेशन ड्राईव, चार कैमरा, पांच मोबाईल, चार लैपटॉप, 10 क्लोन फिंगर प्रिट, 13 एटीएम कार्ड, दो मॉनिटर, दो की-बोर्ड, दो माउस, दो बायोमैट्रिक, दो वाईफाई, दो आधार फिंगर प्रिंट डिवाईस, दो आई स्कैनर, एक रिसिप्ट प्रिंटर, एक राउटर, चार प्रिंटर, दो सीपीयू, 30 आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक वोटर कार्ड, पांच बैंक पासबुक, छः चैकबुक, एक वाईफाई कनैक्टर और एक यूएसबी कनैक्टर पुलिस ने बरामद किया है.
