Patna: तकनीकी शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि बिहार के बच्चों को बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नौकरी मिले, इसके लिए राज्य के सभी अभियंत्रण महाविद्यालयों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को अग्रणी स्तर पर लाया जाएगा. मंगलवार को मुख्यमंत्री ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में विभागीय सचिव हिमांशु शर्मा ने इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक की शैक्षणिक गुणवत्ता, नामांकन, प्लेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च पर प्रेजेंटेशन दिया.
मुख्यमंत्री ने कहा – “तकनीकी शिक्षा को रोजगार, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है. हम चाहते हैं कि बिहार के बच्चे बिहार में ही पढ़ें और यहीं नौकरी-रोजगार पाएं.” बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सचिव लोकेश कुमार सिंह, सचिव हिमांशु शर्मा समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद थे.
मुख्यमंत्री के 7 बड़े निर्देश
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: सभी सरकारी पॉलिटेक्निक में चरणबद्ध तरीके से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएं. ताकि स्टूडेंट्स को उद्योग की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग मिले.
नवाचार पर जोर: तकनीकी संस्थानों में रिसर्च और इनोवेशन के लिए विशेष कार्ययोजना बने. साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग में नए आइडिया को प्रमोट किया जाए.
इंस्टीट्यूट का ब्रांडिंग: कॉलेजों की उपलब्धियों, लैब, प्लेसमेंट और छात्रों की सफलता पर हाई क्वालिटी वीडियो बनाकर व्यापक प्रचार किया जाए. ताकि ज्यादा छात्र तकनीकी शिक्षा की ओर आएं.
साइंस पार्क से कनेक्ट: जिलों में बने साइंस सेंटर और साइंस पार्क को टेक्निकल कॉलेजों से जोड़ा जाए. स्टूडेंट्स को विज्ञान के प्रति प्रेरित करने के लिए स्पेशल प्रोग्राम चलें.
रोजगार पर फोकस: हर कॉलेज में नियमित वर्कशॉप, सेमिनार और इंडस्ट्री एक्सपर्ट के लेक्चर हों. नेशनल-इंटरनेशनल संस्थानों और कंपनियों से टाईअप बढ़ाया जाए.
लैब का आधुनिकीकरण: सभी कॉलेजों की लैब अपग्रेड हों, उपकरण रेगुलर अपडेट हों. कॉलेज वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सारी जानकारी ऑनलाइन मिले.
टीचर ट्रेनिंग सेंटर: तकनीकी शिक्षकों के ट्रेनिंग के लिए समर्पित ट्रेनिंग सेंटर बनाने की संभावना तलाशी जाए.
