Patna: कचरा भी रोजगार और कमाई का स्रोत बन सकता है? बिहार के सिवान जिले में यह सवाल अब हकीकत बन चुका है. यहां ग्रामीण भारत का पहला स्टार्टअप ‘कबाड़ मंडी’ लोगों को कबाड़ बेचकर पैसे कमाने का मौका दे रहा है. साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा दे रहा है। नौतन प्रखंड के खलवां ग्राम पंचायत के मुखिया अमित सिंह ने इस अनोखी पहल की शुरुआत की. उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया, जिसके माध्यम से गांववासी घर-घर से निकलने वाले रिसाइकल योग्य कचरे को बेच रहें हैं. यह स्टार्टअप ‘असराज स्क्रैप सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से स्टार्टअप इंडिया के तहत रजिस्टर्ड है. मात्र 18 महीनों में पूरे सिवान जिले में सफलता हासिल कर ली है और अब इसका विस्तार गोपालगंज जिले तक हो रहा है.

40 किलो प्लास्टिक से बनेगा वॉश बेसिन, 15 साल टिकेगा

ऐप के जरिए लोग अपने घर से निकलने वाले कचरे (जैसे प्लास्टिक, बोतल, रैपर आदि) की जानकारी, टाइम और डेट दर्ज कराते हैं. रीसायकल टीम तय समय पर घर पहुंचती है, कचरे का वजन कर उसके अनुसार तुरंत भुगतान कर देती है. इसके बाद कचरा को पंचायत के प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीडब्ल्यूपीयू) और वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट (डब्ल्यूपीयू) में अलग कर, रिसाइकल करने के बाद उपयोगी सामान बनाया जाता है.

मुखिया अमित सिंह बताते हैं कि प्लास्टिक बोतल 15 रुपये प्रति किलोग्राम, काला प्लास्टिक 2 रुपये प्रति किलोग्राम, सफेद मिक्स प्लास्टिक 5 रुपये प्रति किलोग्राम और टीन 10 रुपये प्रति किलोग्राम खरीदा जाता है. अबतक डेमो प्रोजेक्ट सफल रहा है, आने वाले दिनों में 40 किलो रिसाइकल प्लास्टिक से 3 फीट का वॉश बेसिन, 75 किलो से पार्क बेंच, 35 किलो से 16 इंच का डस्टबिन, फेंस, स्कूल बेंच, फ्लावर पॉट, अलमारी, पोर्टेबल टॉयलेट आदि का निर्माण किया जाएगा. इन सामानों की गारंटी लगभग 15 साल होगी.

उन्होंने आगे कहा कि लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरणा मिली. परिवार के सदस्यों ने मिलकर इस मुहीम को आकार दिया, बड़े बेटे ने मार्केटिंग और बिजनेस डेवलपमेंट संभाला, छोटे ने ऐप बनाया. वर्तमान में अकेले सिवान जिले में प्रति महीने लगभग सवा टन रिसाइकल योग्य कचरे का उठाव हो रहा है. पंचायत खुले में कचरा फेंकने से मुक्त हो चुकी है. खाद्य कचरे से खाद बनाई जा रही है. इसमें 22 लोगों की टीम काम कर रही है, जिन्हें 12 हजार से ज्यादा सैलरी, मेडिकल सुविधा और 7 लाख का बीमा सुविधा प्रदान की गई है.

रिसाइकल प्लास्टिक की सप्लाई भी

इस अनोखे स्टार्टअप ने हरिद्वार, पंजाब और कोका-कोला(बनारस) जैसे संगठनों से टाई-अप किया है, जहां रिसाइकल प्लास्टिक सप्लाई की जा रही है. शादी-विवाह जैसे मौकों पर निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को भी प्रोसेस किया जा रहा है. आने वाले समय में प्लास्टिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल के लिए बेचा जाएगा, जिससे और अधिक लोगों को कमाई का अवसर मिलेगा. यह मॉडल ग्रामीण भारत के लिए एक मिसाल बन रहा है, जहां कचरा रोजगार का जरिया बन गया है.

 

 

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