Patna: राजनीतिकार से विधायक बने प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया है. बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन-सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बीजेपी के गढ़ को ढहा दिया है. PK ने 19246 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है. वही भाजपा के नीरज सिन्हा को 44700 वोट और राजद उम्मीदवार को 14241 वोट मिले है. बता दे कि मोदी 2014, नीतीश-लालू 2015, ममता-स्टालिन 2021 के चुनाव जिताने वाले प्रशांत किशोर अब खुद सदन में पहुंचेंगे. 243 विधायकों में एक नाम और जुड़ गया है, लेकिन इसके सियासी मायने बहुत बड़े हैं.
35 साल का गढ़ 30 दिन में ढहा
बांकीपुर सीट पर बीजेपी का 35 साल से एकछत्र राज था. ‘स्कूल बैग’ लटकाकर गली-गली प्रचार करने वाले प्रशांत किशोर ने इस किले को ध्वस्त कर दिया. बारिश और कीचड़ की परवाह किए बिना PK ने एक-एक मतदाता तक पहुंच बनाई. मतदान प्रतिशत कम रहने के बावजूद उनके समर्थक बूथ तक पहुंचे और जीत पक्की कर दी.
पिछली हार के बाद सबसे जरूरी जीत
पिछले साल विधानसभा चुनाव में जन-सुराज को एक भी सीट नहीं मिली थी. PK सवालों के घेरे में थे. उस हार के बाद उन्होंने कहा था – “संघर्ष जारी रहेगा, बिहार नहीं छोड़ेंगे”. बांकीपुर की जीत उसी का नतीजा मानी जा रही है.
विधानसभा में ‘आंकड़ों वाली राजनीति’
PK विधायक बनकर हवा-हवाई वादों की जगह आंकड़ों के साथ सरकार को घेरेंगे. शिक्षा, रोजगार, पलायन और कृषि उद्योग को मुख्य मुद्दा बनाएंगे. उनका मकसद आरजेडी से ज्यादा विपक्ष में चर्चा में रहना है.
जाति की जगह ‘शिक्षा-रोजगार’ की राजनीति
PK का फोकस युवा और वंचित वर्ग पर है. वे कहते हैं मौजूदा पार्टियां जाति की राजनीति करती हैं. वे बिहार में विकल्प की कमी वाली सोच खत्म करना चाहते हैं. मुस्लिम वोटरों को लेकर आरजेडी पर सीधा हमला – “सिर्फ बीजेपी का डर दिखाकर वोट लिया, भागीदारी नहीं दी”.
जदयू और बीजेपी दोनों के वोट बैंक पर नजर
नीतीश के ‘सुशासन’ वाले वोटरों को इमोशनली जोड़ने की कोशिश होगी. वहीं बीजेपी के अगड़ी जाति के वोट बैंक में सेंधमारी से पार्टी बैकफुट पर है.
पंचायत तक नेटवर्क
पदयात्रा में बने लाखों कार्यकर्ताओं के डेटाबेस को अब 5 साल चलने वाले संगठन में बदला जाएगा. डॉक्टर, शिक्षक, पूर्व अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में उतारने का प्रयोग भी जारी रहेगा.
