Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार क झारखंड मंत्रालय में खान एवं भू-तत्व तथा भवन निर्माण विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में मुख्यमंत्री ने राजस्व सुदृढ़ीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 300 बालू घाटों को शीघ्र संचालित कर 3 हजार करोड़ रुपये का राजस्व सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने अवैध खनन, ओवरलोडिंग और बालू माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ गोल्ड माइनिंग को बढ़ावा देने, बंद खदानों को चालू करने और भवन निर्माण में गुणवत्ता पर सख्ती के निर्देश दिए. उन्होने कहा अवैध खनन से राजस्व की हानि होती है और यह पर्यावरण-लॉ एंड ऑर्डर के लिए चुनौती है। खनिज संपदा राज्य की धरोहर है. पारदर्शी उपयोग से राजस्व बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को लाभ होगा। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता है.”
बालू से 3 हजार करोड़ का टारगेट
राज्य में कुल 820 बालू घाटों में से 444 कैटेगरी-2 के हैं. इनमें से 300 का ऑक्शन हो चुका है. मुख्यमंत्री ने इनसे शीघ्र बालू उठाव शुरू कराकर 3 हजार करोड़ राजस्व का लक्ष्य दिया. शेष घाटों का भी जल्द ऑक्शन होगा. पंचायतों के जरिए 376 कैटेगरी-1 घाटों से उठाव जारी है.
बंद कोल खदानों पर एक्शन
BCCL, CCL, ECL की बंद पड़ी खदानों को चालू कराने या लीज निरस्त कर फिर से ऑक्शन करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया है. नीलाम हो चुके कोल ब्लॉकों को भी जल्द संचालित करने को कहा है. राज्य में 7 गोल्ड माइंस से अभी 20 किलो सालाना उत्पादन हो रहा है. मुख्यमंत्री ने उत्पादन बढ़ाने, बाधाएं दूर करने और नए गोल्ड खदानों का ऑक्शन तेज करने को कहा है. अवैध खनन, बालू उठाव, ओवरलोडिंग रोकने के लिए आधुनिक तकनीक, नियमित निरीक्षण और पुलिस-प्रशासन का संयुक्त अभियान चलेगा. मशीन से बालू उठाव पर रोक की समीक्षा होगी.
JSMDC-JMECL मजबूत होंगे
झारखंड राज्य खनिज विकास निगम और झारखंड माइनिंग एंड एक्सप्लोरेशन कंपनी के लिए अधिक खनिज क्षेत्र आरक्षित होंगे. रिक्त पदों पर नियुक्ति और SOP बनाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया है. डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट निधि से राज्य स्तरीय परियोजनाएं बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन होगा. इमराल्ड के लिए चिन्हित ब्लॉकों को JSMDC/JMECL के लिए सुरक्षित रखने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा. वैज्ञानिक खनन के साथ पहाड़ों के संरक्षण पर ध्यान. पत्थर के अत्यधिक बाहरी निर्यात पर नियंत्रण के उपाय खोजे जाएंगे.
छात्रावासों में कोयला सप्लाई
JSMDC के जरिए MSME को कोयला आपूर्ति बढ़ेगी. LPG की कमी देखते हुए छात्रावासों में वैकल्पिक ऊर्जा के रूप में कोयले के उपयोग की योजना बनेगी. सभी सरकारी भवन, स्कूल, अस्पताल तय समय और गुणवत्ता से बनें. आधुनिक तकनीक अपनाएं, नियमित मॉनिटरिंग हो.
