Patna: बिहार की नदियों में जमा गाद (सिल्ट) अब बाढ़ की समस्या बढ़ाने के बजाय राज्य के विकास में इस्तेमाल होगी. नदियों से निकाली गई गाद से राष्ट्रीय राजमार्गों और दूसरी आधारभूत संरचना परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा. इसके लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में केंद्र सरकार और बिहार सरकार के बीच ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के तहत ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस पहल के तहत 16 चालू राजमार्ग परियोजनाओं में 243 लाख घनमीटर गाद का उपयोग किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया.

देश का पहला राज्य बना बिहार, लागू की अपनी सिल्ट प्रबंधन नीति

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने नदियों और जलस्रोतों में जमा गाद के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए अपनी अलग नीति बनाई है. बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 के तहत नदियों से गाद निकालने और उसके उपयोग की व्यवस्था विकसित की जाएगी. इसका उद्देश्य नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाना, जलप्रवाह को बेहतर बनाना और निकाली गई गाद को सड़क निर्माण जैसी विकास परियोजनाओं में उपयोग करना है. इससे प्राकृतिक ऊपरी मिट्टी के दोहन में भी कमी आएगी.

243 लाख घनमीटर गाद से 16 हाईवे परियोजनाओं को मिलेगी गति

समझौते के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की जरूरत के अनुसार बिहार सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी. नदियों से निकाली गई गाद को वैकल्पिक निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. फिलहाल बिहार में 58,340 करोड़ रुपये के निवेश से 1,561 किलोमीटर लंबाई की 39 NHAI परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. इसके अलावा 1,85,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं. विभिन्न नदियों पर क्षेत्रीय संपर्क बेहतर बनाने के लिए 29 नए पुलों का निर्माण भी जारी है.

बाढ़ का प्रभाव होगा कम, किसानों को मिलेगा सिंचाई के लिए पानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल में भारी बारिश और दूसरे राज्यों से आने वाले पानी के कारण बिहार को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है. वहीं, फरक्का बैराज के कारण गंगा नदी में गाद जमा होने की समस्या भी गंभीर है. नदियों से गाद निकालने और जलस्रोतों का पुनर्जीवन करने से जलधारण एवं जलप्रवाह क्षमता में सुधार होगा. इससे बाढ़ के प्रभाव को कम करने, जल संरक्षण और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर बिहार में इस कार्यक्रम को लागू करने की बात कही. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना से सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा.

गंगा के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क बनाने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से गंगा नदी के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क निर्माण कराने का विशेष आग्रह किया. उन्होंने कहा कि बिहार बांग्लादेश को पानी दिए जाने का विरोधी नहीं है, लेकिन राज्य की अपनी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. वर्तमान व्यवस्था में बिहार को जुलाई से अक्टूबर तक केवल चार महीने गंगाजल के उपयोग का अवसर मिलता है. कृषि, उद्योग और पेयजल की जरूरतों को देखते हुए राज्य को पर्याप्त जल उपलब्ध होना चाहिए.

एक लाख एकड़ नई जमीन मिलने का दावा, बनेंगी गंगा फेसिंग कॉलोनियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों से गाद निकाले जाने के बाद लगभग एक लाख एकड़ नई भूमि उपलब्ध होने की संभावना है. इस भूमि पर मुंबई और दिल्ली की तर्ज पर बिहार में भी गंगा फेसिंग कॉलोनियां और आवास विकसित किए जा सकेंगे. उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है. इनमें पटना में पाटलिपुत्र, गया में मगध, मुंगेर में अंग, भागलपुर में विक्रमशिला, सहरसा में कोसी, दरभंगा में मिथिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और सीतापुरम प्रमुख हैं. इसके साथ ही राज्य में 10 नए एयरपोर्ट और 32 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की दिशा में भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इन परियोजनाओं में भी नदियों से निकाली गई गाद का उपयोग किया जा सकेगा.

विकास की नई राह खोलेगी ‘नदी संजीवनी’

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की दो प्रमुख चुनौतियां अधिक आबादी और अनियंत्रित जलप्रवाह अब विकास की ताकत बन सकती हैं. ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, बाढ़ के प्रभाव को कम करने और आधारभूत संरचना के विस्तार को एक साथ आगे बढ़ाएगा. इससे नदियों का पुनर्जीवन होने के साथ सड़क निर्माण को भी नई गति मिलेगी.

इस अवसर पर बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, NHAI अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, बिहार पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

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