Patna: बिहार में बैंकिंग सेक्टर के खराब प्रदर्शन पर वित्त विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. डिप्टी सीएम-सह-वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव की सहमति के बाद विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने 5 सूत्री कड़े निर्देश जारी किए हैं. खराब प्रदर्शन करने वाले 15 बैंकों की निगरानी होगी और 6 महीने में सुधार न दिखाने पर उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगा दी जाएगी.

क्या हैं 5 बड़ी अनुशंसाएं

ACP का टारगेट बढ़ेगा: राज्य का CD Ratio बढ़ाने के लिए संभावित डिपॉजिट का न्यूनतम 80% लक्ष्य रखा जाए. नाबार्ड ने PLP संशोधित कर 3,55,532 करोड़ रुपये तय किया है. उसी आधार पर नया ACP बनाने को SLBC से कहा गया है.

SBI-PNB पर फोकस: SBI को हटाने पर राज्य का CD Ratio 68.16% और SBI-PNB दोनों को हटाने पर 72.75% हो जाता है. छोटे बैंकों का प्रदर्शन बेहतर है। इसलिए प्रमुख बैंकों को ACP का ज्यादा लक्ष्य दिया जाए.

जनसमर्थ पोर्टल से जुड़ेंगे बैंक: KCC और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए जनसमर्थ पोर्टल पर इंटीग्रेशन होगा. इससे सभी बैंकों को सीधे आवेदन मिलेंगे और मॉनिटरिंग आसान होगी.

पंचायत स्तर पर प्रचार: सहयोग शिविरों में जनसमर्थ पोर्टल पर KCC आवेदन अपलोड करने का प्रचार होगा. जीविका दीदी, SHG और 50 लाख किसानों को टारगेट किया जाएगा.

15 बैंक रडार पर: जिन बैंकों का CD Ratio में सुधार कम है और ACP में उपलब्धि 60% से नीचे है, उनकी मॉनिटरिंग होगी. 6 महीने में सुधार नहीं तो डिपॉजिट रोक.

इन बैंकों पर नजर

UCO Bank, Union Bank, Central Bank, PNB, Bank of India, SBI, IDBI, Indian Overseas Bank, Bandhan Bank, Bank of Maharashtra, Karnataka Bank, Unity SFB, Indusind, Utkash SFB, Karur Vysya Bank को वित्त सचिव के स्तर से पत्र भेजा जाएगा.

क्यों बनी समिति

22 जनवरी 2026 को डिप्टी सीएम की अध्यक्षता में हुई 95वीं SLBC बैठक में उच्च स्तरीय समिति गठित करने का फैसला हुआ था. विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति में ACS वित्त, RBI निदेशक, नाबार्ड CGM, SBI CGM सदस्य हैं. समिति ACP और CD Ratio की नियमित समीक्षा करेगी.

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