Ranchi: GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नाम पर देश के सबसे बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है. ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि एक सिंडिकेट ने सिर्फ कागजों पर 133 शेल कंपनियों का जाल बुन रखा था. इन कंपनियों से बिना एक भी ट्रक माल भेजे 5000 करोड़ रुपये के बोगस बिल जारी किए गए और 734 करोड़ रुपये का फर्जी ITC जनरेट कर देश भर की कंपनियों को कमीशन पर बेच दिया गया. ये जांच जमशेदपुर DGGI की शिकायत पर शुरू हुई थी. जांच में सामने आया कि सिंडिकेट की कंपनियां हकीकत में अस्तित्व में ही नहीं थीं. फर्जी बिल काट कर दूसरी लाभार्थी कंपनियों को ITC पास किया जाता था, ताकि वे अपना GST देनदारी चुरा सकें. इसी फर्जी क्रेडिट को कमीशन लेकर बाजार में बेचा जाता था. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस काले खेल से आए 54.33 करोड़ रुपये को M/s Maa Sharda Endeavours Pvt. Ltd., M/s Makers Casting Pvt. Ltd., M/s Kedarnath Trexim Pvt. Ltd. और कर्मचारियों के नाम बनी M/s Jai Bhole Enterprises जैसी फर्मों के जरिए घुमाया गया. बाद में इसे निजी और रिश्तेदारों के बैंक खातों में लेयरिंग कर चल-अचल संपत्ति खरीदने और बिजनेस में लगाया गया.
फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड को भेजा गया जेल
ईडी रांची जोन ने GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के 734 करोड़ रुपये के महाघोटाले में कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर के चर्चित कारोबारी ज्ञानचंद जैसवाल उर्फ बबलू जैसवाल और उसके बेटे राज जैसवाल को 30 सितंबर को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया. दोनों को 1 अक्टूबर को रांची के विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. ईडी ने 30 सितंबर को ही जमशेदपुर, झारखंड और कोलकाता (बंगाल) में 4 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था. ये ठिकाने बबलू जैसवाल, सीए संजय पारेख और अन्य के आवासीय और दफ्तर से जुड़े हैं. तलाशी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद कर जब्त किए गए हैं.
कई शहरों में छापेमारी और करोड़ की संपत्ति ज़ब्त
इससे पहले मई 2025 और अगस्त 2025 में कोलकाता, जमशेदपुर, रांची आदि स्थानों पर आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें कई डिजिटल उपकरण, संदिग्ध दस्तावेज और लगभग 70 लाख कैश/बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए थे. ईडी अब तक 20 करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के अनंतिम जब्ती आदेश (PAO) जारी कर चुकी है. इस मामले में पीएमएलए के तहत 8 मई 2025 को भी 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से तीन अभी न्यायिक हिरासत में हैं. मामले में चार्जशीट (Prosecution Complaint) दाखिल की जा चुकी है और ट्रायल जारी है. मामले में आगे की जांच जारी है.
