Patna: पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया अंचल में करीब 50 वर्षों से चली आ रही जमाबंदी को कथित तौर पर शून्य कर दूसरे व्यक्ति के नाम ऑनलाइन दर्ज करने के मामले में तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने सख्त रुख अपनाया है. आयुक्त ने जिलाधिकारी, पश्चिम चंपारण को मामले में दोषी कर्मी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने, दंडात्मक कार्रवाई करने और जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में सुधार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. साथ ही जमाबंदी में बदलाव का आदेश देने वाले पदाधिकारी का नाम और आदेश भी स्पष्ट करने को कहा है.
5.62 एकड़ जमीन की जमाबंदी बदलने का आरोप
मामला मौजा एवं हल्का पूर्वी कर्गहिया, बेतिया अंचल की जमाबंदी संख्या-105 से जुड़ा है. आयुक्त को मिले परिवाद के अनुसार, करीब 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन की जमाबंदी 50 वर्षों से अधिक समय से परिवादी के पिता के नाम पर चली आ रही थी. परिवादी का दावा है कि इस दौरान नियमित रूप से लगान भी जमा किया जाता रहा है. आरोप है कि इस पुरानी जमाबंदी को शून्य कर जमीन किसी ऐसे व्यक्ति के नाम दर्ज कर दी गई, जिसका परिवादी के परिवार से कोई संबंध नहीं है। इसके लिए जमीन को बेतिया राज से संबंधित बताया गया. शिकायत में इस कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर की जांच की मांग की गई.
बिना सक्षम न्यायालय के आदेश जमाबंदी बदलने पर सवाल
आयुक्त ने कहा कि सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना लंबे समय से चली आ रही जमाबंदी को निरस्त करना या उसमें छेड़छाड़ करना गंभीर मामला है. उन्होंने प्रथम दृष्टया इस कार्रवाई को लाभ से प्रेरित होने की आशंका वाला कृत्य बताते हुए आपराधिक कार्रवाई की आवश्यकता जताई है. आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि पुरानी जमाबंदी को शून्य करने और दूसरे व्यक्ति के नाम नई जमाबंदी कायम करने का आदेश किस स्तर से जारी हुआ था.
डीएम, अपर समाहर्ता और सीओ को तलब
मामले में जवाबदेही तय करने के लिए आयुक्त ने जिलाधिकारी, पश्चिम चंपारण, अपर समाहर्ता (राजस्व) और अंचल अधिकारी, बेतिया को 21 अक्टूबर को आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. अधिकारियों को सभी तथ्यों और संबंधित अभिलेखों के साथ प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा. आयुक्त ने निर्देश दिया है कि 21 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक संबंधित प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए. वहीं, उसी दिन अपराह्न तीन बजे तीनों अधिकारियों को आयुक्त कार्यालय प्रकोष्ठ में उपस्थित होकर मामले में अपनी रिपोर्ट और स्पष्टीकरण देना होगा.
नई जमाबंदी में सिर्फ 53 डिसमिल जमीन दर्ज होने पर सवाल
आयुक्त ने मामले में एक अहम बिंदु उठाते हुए कहा कि नई जमाबंदी में मात्र 53 डिसमिल जमीन दर्ज है, जबकि मूल जमाबंदी में कुल 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन शामिल बताई गई है. ऐसे में शेष जमीन का रिकॉर्ड कहां गया, इसका स्पष्ट जवाब देना होगा.
उन्होंने निर्देश दिया कि गलत तरीके से बदली गई जमाबंदी को तत्काल दुरुस्त कर सही व्यक्ति के नाम कायम करने की कार्रवाई की जाए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जमाबंदी में बदलाव किन परिस्थितियों में किया गया और क्या जिलाधिकारी या अपर समाहर्ता (राजस्व) के स्तर से अंचल अधिकारी को इस संबंध में कोई आदेश दिया गया था.
ऑनलाइन रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कैसे हुई, बतानी होगी वजह
आयुक्त ने अंचल अधिकारी, बेतिया से यह भी पूछा है कि ऑनलाइन दर्ज जमाबंदी में किस प्रकार बदलाव किया गया. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध आपराधिक और विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है.
आयुक्त ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी.
राजस्व मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
इस मामले के साथ आयुक्त ने तिरहुत प्रमंडल के सभी जिलों के राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राजस्व मामलों का नियमानुसार और विधिवत निष्पादन सुनिश्चित करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
आयुक्त के अनुसार, ऐसे मामले सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित कर सख्त अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने जनहित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया.
