Patna: बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग मछली आहार उत्पादन में भी राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तेजी से प्रयास कर रहा है. अब राज्य अपनी आवश्यकता के आधे से अधिक मछली आहार का उत्पादन खुद कर रहा है. विभाग के प्रयास से 79 फिश फीड मिल लगाए गए हैं, जहां 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन हो रहा है. माना जा रहा है कि पूरक आहार उपलब्ध होने से राज्य में मछली की उत्पादकता एवं उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी होगी.
राज्य सरकार मछली का चारा उत्पादन करने वाले फीड मिलों को कई तरह से सहायता दे रही है, ताकि अधिक से अधिक मछली चारा का उत्पादन हो सके. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की योजना के तहत फीड मिलों को विद्युत वित्तीय सहायता भी दी जा रही है. 100 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाले फीड मिलों को 3 रुपये प्रति यूनिट, अधिकतम 2 लाख रुपये प्रति माह तथा अधिकतम 24 लाख रुपये प्रति वर्ष की दर से विद्युत वित्तीय सहायता राशि दी जा रही है.
39 हजार टन मछलियों का हुआ निर्यात
मछली उत्पादन में बिहार ने पहले ही आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है. अब राज्य तेजी से निर्यात की दिशा में आगे बढ़ रहा है. राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य से 39.07 हजार टन मछलियां बाहर भेजी गई हैं, जिसमें नेपाल, सिलीगुड़ी, लुधियाना, अमृतसर, बनारस, गोरखपुर, देवरिया, कप्तानगंज, रांची तथा गोड्डा आदि प्रमुख शहर शामिल हैं. बिहार में उत्पादित मछलियों की मांग राज्य के बाहर लगातार बढ़ रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बिहार से होने वाला मछलियों का निर्यात और बढ़ेगा.
देश का चौथा बड़ा मछली उत्पादक राज्य है बिहार
वर्ष 2014-15 से 2024-25 तक मछली उत्पादन में करीब 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है. वर्ष 2013-14 के आंकड़ों के मुताबिक, मछली उत्पादन में बिहार राष्ट्रीय रैंकिंग में नौवें स्थान पर था. वहीं, उत्पादन में वृद्धि के बाद वर्ष 2023-24 में बिहार चौथे स्थान पर आ गया है. इस तरह बिहार ने हाल के वर्षों में तेजी से तरक्की करते हुए मछली उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत और स्थिर प्रगति की है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में 8.73 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था. वहीं, वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 9.59 लाख मीट्रिक टन हो गया है. इसका परिणाम है कि बिहार अब मछली निर्यात की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
