Patna: राज्यभर में समाज कल्याण विभाग की तरफ से 8वां पोषण पखवाड़ा 2026 (9-23 अप्रैल,2026) व्यापक स्तर पर मनाया जा रहा है. इस वर्ष का थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना” निर्धारित है. राज्य के सभी 38 जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से यह अभियान सक्रिय रूप से चलाया जा रहा है. इस दौरान पोषण पंचायत, जागरूकता रैलियां, स्वास्थ्य शिविर, पोषण प्रदर्शनियां एवं प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं. इस अभियान को लेकर सभी जिलों में 64 लाख 91 हजार 371 जन आंदोलन गतिविधियां दर्ज की गई है. अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समाज कल्याण विभाग की सचिव एवं आईसीडीएस निदेशक की ओर से नियमित रूप से समीक्षा की जा रही हैं.
पोषण पखवाड़ा के दौरान 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों को टेक-होम राशन के रूप में चावल, दाल, सोयाबड़ी इत्यादि दिया जा रहा है. वही 3 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म पका हुआ पौष्टिक भोजन जैसे खिचड़ी ,पुलावआदि उपलब्ध कराया जा रहा है. इन आहारों में दालें, सोयाबीन, मूंगफली, हरी सब्जियां और दूध जैसे प्रोटीन तथा विटामिन युक्त पदार्थ मौजूद हैं. साथ ही कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए सैम-मैम स्क्रीनिंग, वजन-लंबाई माप और एनीमिया की जांच की जा रही है. माताओं को स्तनपान, उचित ऊपरी आहार तथा स्वच्छता के बारे में जागरूक किया जा रहा है. विशेष रूप से अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर उपचार और पौष्टिक आहार की सलाह दी जा रही है.
इस वर्ष अभियान में विशेष रूप से पुरुषों (पिताओं) की भागीदारी पर बल दिया गया है. अब बाल पोषण एवं देखभाल को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी न मानकर, इसे साझा पारिवारिक दायित्व के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है. आंगनबाड़ी केंद्रों में पिताओं के लिए विशेष सत्र एवं कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें उन्हें संतुलित एवं पौष्टिक आहार सुनिश्चित करने, गर्भवती महिलाओं एवं छोटे बच्चों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने, पोषण ट्रैकर के उपयोग, बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने तथा स्क्रीन टाइम कम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है, विशेषकर जीवन के पहले 1000 दिनों में। इस अवधि में उचित पोषण, उत्तरदायी देखभाल, प्रारंभिक उत्प्रेरण (0–3 वर्ष) एवं खेल-आधारित शिक्षा (3–6 वर्ष) बच्चों के संज्ञानात्मक, शारीरिक एवं भावनात्मक विकास की मजबूत नींव रखते हैं. बिहार में कुपोषण, स्टंटिंग, वेस्टिंग एवं एनीमिया अभी भी प्रमुख चुनौतियां हैं. पोषण पखवाड़ा इन समस्याओं से निपटने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने, परिवार एवं समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा व्यवहार परिवर्तन लाने का एक प्रभावी माध्यम है.
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु पोषण को सुदृढ़ करना, 0–3 वर्ष के बच्चों में प्रारंभिक मस्तिष्क उत्प्रेरण को बढ़ावा देना, 3–6 वर्ष के बच्चों में खेल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना, बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर आधारभूत संरचना, समुदाय की भागीदारी एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के माध्यम से सशक्त बनाना है.
