Patna: बिहार में उच्च शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा शैक्षणिक संस्थानों की आधारभूत संरचना मजबूत करने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं. राज्य के 211 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए प्रति महाविद्यालय 25 करोड़ रुपये की दर से कुल 5275 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का अनुरोध किया गया है. इसके साथ ही बिहार में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दो केंद्र और अधिक केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग भी उठाई गई. शनिवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की अध्यक्षता में उच्च एवं विद्यालयी शिक्षा से जुड़े विषयों पर समीक्षा बैठक हुई. बैठक में केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति, शैक्षणिक संस्थानों के आधारभूत ढांचे और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई.
211 कॉलेजों के बुनियादी ढांचे के लिए 5275 करोड़ का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में वर्तमान में 211 राजकीय डिग्री महाविद्यालय संचालित हैं. इन महाविद्यालयों में आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण और शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रति कॉलेज 25 करोड़ रुपये की दर से कुल 5275 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया गया है. इस राशि से महाविद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.
बिहार में खुलें बीएचयू के दो केंद्र
उच्च शिक्षा के विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बिहार में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दो केंद्र खोलने का अनुरोध किया. उनका कहना है कि इससे राज्य के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने राज्य में और अधिक केंद्रीय विद्यालय खोलने का भी आग्रह किया, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध हो सकें.
विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना प्रक्रिया तेज करने का आग्रह
मुख्यमंत्री ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि इसके लिए 15 जुलाई 2026 को 220 एकड़ जमीन हस्तांतरित कर दी गई है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस परियोजना पर आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द करने का अनुरोध किया.
विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना से बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार और शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है.
सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग 80 प्रतिशत विद्यालय सरकारी हैं और करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में नामांकित हैं. ऐसे में सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर आधारभूत संरचना और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है.
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी के प्रति आभार व्यक्त किया. साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन किया जाए और भारत सरकार से आवंटित राशि का समयबद्ध तरीके से शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं को तेजी से पूरा करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और निर्धारित लक्ष्यों को तय समय-सीमा के भीतर हासिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.
101 परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
बैठक में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA-1 एवं RUSA-2) और प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई. इन योजनाओं के तहत कुल 101 परियोजनाएं स्वीकृत हैं. अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी दी.
बैठक में उच्च शिक्षा के विस्तार, सरकारी विद्यालयों की आधारभूत संरचना मजबूत करने, शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार और केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया. बैठक में बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह एवं संजय कुमार सिंह सहित भारत सरकार और बिहार सरकार के कई वरीय अधिकारी उपस्थित थेय शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लियाय बैठक का उद्देश्य शिक्षा संबंधी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और बिहार की शिक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना रहा.
