Ranchi: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मंगलवार को रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में तीन दिवसीय “झारखंड कृषि व्यापार मेला-2026” का भव्य उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि खेती-किसानी के विकास के लिए सरकार और किसानों को साझा जिम्मेदारी उठानी होगी. “आधी जिम्मेदारी सरकार उठाएगी और आधी जिम्मेदारी किसानों को उठानी होगी. जब दोनों मिलकर प्रयास करेंगे तो झारखण्ड के किसानों को कोई हरा नहीं सकता.” मुख्यमंत्री ने कृषि व्यापार मेला-2026 के लोगो का लोकार्पण किया. साथ ही टाना भगत परिवारों को चार दुधारू पशुओं के शेड निर्माण के लिए शत-प्रतिशत अनुदान की राशि दी. राज्य के उत्कृष्ट किसानों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया. विभिन्न जिलों के कृषि कार्यालयों में पशु चिकित्सक और अनुसेवक के पद पर नियुक्ति पत्र सौंपे गए. 209 प्रगतिशील किसानों को Digital AI Kit भी प्रदान की गई.
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, “भारत एक कृषि प्रधान देश है. देश की आजादी के बाद सबसे पहली परिकल्पना हमारे अन्नदाता को लेकर ही की गई थी, इसीलिए ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा बुलंद हुआ. खेती-बाड़ी का इतिहास किसी भी जाति-धर्म से पुराना है. कृषि ने ही घुमंतू इंसान को समाज की नींव रखना सिखाया.” मुख्यमंत्री ने बिरसा कृषि रथ-2026 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मेले में लगे स्टॉलों का भ्रमण कर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए. 16 से 18 जून तक चलने वाले इस मेले में देशभर के कृषि वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान शामिल हो रहे हैं. 200 सरकारी-गैर सरकारी स्टॉल लगाए गए हैं। सेमिनार में किसानों को नई तकनीक की जानकारी दी जाएगी.
जलवायु परिवर्तन पर जताई चिंता: ‘खेतों में बनाएं जल संचय की जगह’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की 80% आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन जलवायु परिवर्तन से खेती पर नकारात्मक असर पड़ा है. “आने वाले समय में पीने और खेती के पानी का घोर संकट होने वाला है. भू-जल का सिर्फ दोहन हो रहा है. जितना धरती से लेते हैं, उतना रिचार्ज पिट और सोक पिट से वापस लौटाना होगा.” उन्होंने किसानों से अपने खेतों में जल संचय के लिए काम शुरू करने की अपील की.
‘अंधाधुंध शहरीकरण अभिशाप’: 100 साल पुराने जंगल उजड़ रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों और उद्योगों के नाम पर 50-100 साल पुराने जंगल उजाड़े जा रहे हैं. शहर कंक्रीट के बेजान जंगल बन रहे हैं. “विकास की लकीर के साथ विनाश की लकीर खिंच रही है. इसे रोकने के लिए जन-भागीदारी जरूरी है. पेड़-पानी बचेगा तभी गाय-बकरी और इंसान बचेंगे.”
बिरसा हरित ग्राम योजना की वैश्विक गूंज: सिमडेगा का आम लंदन पहुंचा
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 1.50 लाख एकड़ बंजर जमीन पर फलदार पेड़ लगाए गए हैं. “सिमडेगा की JSLPS दीदियाँ मुझसे मिली थीं. उनके उपजाए आम आज सीधे लंदन निर्यात हो रहे हैं. सरकारी योजनाओं और किसानों के प्रयास से वैश्विक पहचान बनी है.”
जैविक खेती पर जोर: ‘जहर मत डालिए’
मुख्यमंत्री ने किसानों से रासायनिक खाद कम से कम इस्तेमाल करने और जैविक खाद अपनाने की अपील की. “चंद रुपयों के लालच में दूसरों की जान खतरे में न डालें. जहर वाला अनाज घूमकर हमारे परिवार के पेट में ही जाता है. जिन राज्यों में रसायन का इस्तेमाल हुआ, वहां का फसल कोई नहीं ले रहा.”
प्रगतिशील किसानों को मिलेगा ‘मुख्यमंत्री सम्मान’
हेमन्त सोरेन ने कृषि विभाग को बेहतर खेती करने वाले किसानों की मैपिंग करने का निर्देश दिया. “उत्कृष्ट किसानों को सीधे मुख्यमंत्री की तरफ से सम्मानित किया जाएगा. तकनीकी उपकरणों के लिए आर्थिक मदद भी देंगे.” किसानों के सवालों के त्वरित समाधान के लिए विभाग को विशेष पोर्टल बनाने का आदेश दिया. “जहाँ किसान अपनी बात रख सकेंगे और सरकार-वैज्ञानिक तुरंत समाधान देंगे.”
