Patna: बिहार ने पिछले 20 वर्षों में विकास का नया मॉडल पेश किया है. मानव विकास, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक प्रगति में राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है. योजना एवं विकास विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक 2004 से 2024 के बीच प्रति व्यक्ति आय में 13 गुना वृद्धि हुई है और बहुआयामी गरीबी घटाने में बिहार ने देश में सबसे तेज रफ्तार पकड़ी है.
कहां-कहां मारी बाजी
आय में रिकॉर्ड उछाल: वर्ष 2004 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 5,780 रुपये थी जो 2024-25 में बढ़कर 76,490 रुपये हो गई. यह 1,223% यानी 13 गुना वृद्धि है. इस दौरान 13% वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर रही, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है.
गरीबी घटाने में नंबर-1: नीति आयोग के MPI के अनुसार 2015-16 से 2019-21 के बीच बहुआयामी गरीबी 51.89% से घटकर 33.76% रह गई. 18.13% अंक की यह कमी देश में सबसे ज्यादा है. राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में सिर्फ 9.89% अंक की गिरावट आई.
मानव विकास में आगे: बिहार का HDI 2006 के 0.485 से बढ़कर 2023 में 0.614 हो गया. 27% की यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत 23% से अधिक है.
स्वास्थ्य-पोषण में क्रांति
संस्थागत प्रसव: 2005-06 के 19.9% से बढ़कर 2023-24 में 81.1% हुआ. चार गुना से ज्यादा उछाल.
जीवन प्रत्याशा: 64.2 वर्ष से बढ़कर 69.5 वर्ष पहुंची.
कुपोषण में कमी: बच्चों में ठिगनापन 20%, कम वजन 20.2% और क्षीणता 8.1% अंक घटी. ये आंकड़े राष्ट्रीय सुधार से बेहतर हैं.
शिक्षा-स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा
प्रति व्यक्ति विकास व्यय: 2005-06 के 1,463 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 13,279 रुपये.
स्वास्थ्य पर खर्च: 14.8 गुना वृद्धि.
शिक्षा पर खर्च: 13.2 गुना वृद्धि
SDG में फ्रंट रनर बना बिहार
स्वच्छ जल-स्वच्छता SDG-6: 98 अंकों के साथ देश में तीसरा स्थान.
स्वास्थ्य SDG-3: स्कोर 2018-19 के 44 से बढ़कर 2023-24 में 67 हुआ. बिहार ‘Aspirant’ से ‘Front Runner’ श्रेणी में पहुंचा.
समग्र SDG स्कोर: 48 से बढ़कर 57 हुआ। राज्य अब ‘Performer’ श्रेणी में है.
बेरोजगारी में भी सुधार
PLFS 2024 के अनुसार बिहार की बेरोजगारी दर 3% है जो राष्ट्रीय औसत 3.2% से कम है।योजना एवं विकास विभाग का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और स्वच्छता पर निरंतर निवेश और लक्षित योजनाओं से ये नतीजे मिले हैं. ये आंकड़े विकसित बिहार के संकल्प को मजबूती देते हैं.
स्रोत: ग्लोबल डेटा लैब, MoSPI, नीति आयोग, NFHS-3 व 6, SRS, बिहार आर्थिक सर्वेक्षण.
