Patna: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खगड़िया जिला के चौथम प्रखंड स्थित मां कात्यायनी मंदिर में मां कात्यायनी का दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और राज्य की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की. मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना के पश्चात् कात्यायनी मंदिर में चल रहे जीर्णोद्धार एवं सौंदर्याकरण कार्य का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान पर्यटन विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को साइट मैप के माध्यम से कार्य योजना की जानकारी दी. निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मां कात्यायनी मंदिर के दर्शन करनेवाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने के लिए जिन संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है उसे बेहतर ढंग से और तेजी से पूर्ण करें. उन्होंने कहा कि मंदिर आनेवाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का बेहतर ढंग से ख्याल रखें. मुख्यमंत्री को मंदिर समिति द्वारा प्रतीक चिह्न एवं चुनरी भेंटकर स्वागत किया गया.

इसके पश्चात् मुख्यमंत्री ने खगड़िया-सहरसा पथ (एस०एच०- 95) के उन्नयन, चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य की प्रगति का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि इस योजना को गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य करते हुए 31 दिसम्बर 2026 तक पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाय. यह पथ खगड़िया और सहरसा जिला को जोड़ती है. इस पथ के निर्माण से खगड़िया और सहरसा की दूरी 90 कि०मी० से कम होकर केवल 55 किमी रह जाएगी. इस परियोजना के तहत पथ की लंबाई 28.08 किमी है. इस पथ के संरेखण में चार नदियां बागमती, कात्यायनी, मृत कोसी एवं कोसी पर वृहत पुल नहीं रहने के कारण बदलाघाट बांध (किमी 7.3) से फन्गो हॉल्ट (किमी 14.125) तक 6.82 किमी में रहनेवाले लोगों को सीधा संपर्क सड़क उपलब्ध नहीं है, जिससे लोगों को खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा एवं सुपौल जाने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. परियोजना पूरा होने पर इस क्षेत्र के लोगों को काफी फायदा होगा. इस पथ के पूरा हो जाने से मां कात्यायनी मंदिर का भी सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा. साथ ही इस क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा.

सुल्तानगंज-अगुवानी घाट पुल दिसंबर 2027 तक पूरा करने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने सुल्तानगंज (भागलपुर जिला) एवं अगुवानी घाट (खगड़िया जिला) के बीच गंगा नदी पर पहुंच पथ निर्माण कार्य एवं उच्चस्तरीय आरसीसी पुल का हवाई सर्वेक्षण किया और फिर स्थलीय निरीक्षण भी किया और निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया. निरीक्षण के पश्चात् मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक की और कहा कि इस पुल एवं पहुंच पथ का गुणवत्तापूर्ण ढंग से निर्माण कार्य 2027 तक निश्चित रूप से पूर्ण करें. इस सेतु के बनने से क्षेत्रीय एवं अंतर्राज्यीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि उत्तरी बिहार एवं दक्षिणी बिहार का आपस में कनेक्टिविटी बेहतर होगा. देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम में भगवान शिव पर जलाभिषेक करने के लिए जो श्रद्धालु सुल्तानगंज से जल उठाते हैं उन्हें भी आवागमन में सुविधा होगी और समय की बचत होगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में किसानों द्वारा उत्पादित फसलों के आयात-निर्यात में सहूलियत होगी जिसका लाभ किसानों को सीधा मिलेगा. उन्होंने कहा कि एप्रोच पथ पर ठीक ढंग से वृक्षारोपण कराएं. पुल के एप्रोच पथ पर प्रकाश की बेहतर सुविधा हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी लोगों की सुविधा का ख्याल रख रही है. विकास के कई कार्य किए जा रहे हैं. बिहार को समृद्ध बनाने के लिए हमलोग कृत संकल्पित हैं.

पटना की तर्ज पर मुंगेर भागलपुर गंगा पथ पर बनेगा मरीन ड्राइव

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में प्रस्तावित मुंगेर (सफियाबाद)-बरियारपुर-घोरघट-सुल्तानगंज गंगा पथ एवं सुल्तानगंज- भागलपुर-सबौर गंगा पथ परियोजना की समीक्षात्मक बैठक हुई. मुंगेर स्थित बबुआघाट पर आयोजित इस समीक्षात्मक बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मुंगेर भागलपुर गंगा पथ परियोजना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी. पथ निर्माण विभाग के सचिव ने अपने प्रस्तुतीकरण में परियोजना की व्यापक विशेषता, प्रस्तावित गंगा पथ एलाइनमेंट, जमीन अधिग्रहण की स्थिति, घाटों का पुनर्विकास, नए प्रस्तावित घाट आदि के संबंध में मुख्यमंत्री को अवगत कराया. पंकज कुमार पाल ने बताया कि सफियाबाद (मुंगेर) से सुल्तानगंज (भागलपुर) तक प्रस्तावित गंगा पथ परियोजना की कुल लंबाई 42 किलोमीटर है, जबकि सुल्तानगंज-भागलपुर-सबौर गंगा पथ परियोजना की कुल लंबाई 41.33 किलोमीटर है.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रस्तावित मुंगेर भागलपुर गंगा पथ परियोजना के भू-अर्जन इत्यादि के काम में तेजी लाकर शीघ्र इस परियोजना का कार्य शुरू कराएं. मुंगेर शहरवासियों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसको ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित गंगा पथ परियोजना के एलाइनमेंट का कार्य सुनिश्चित कराएं. मुंगेर से बरियारपुर के बीच स्थल चिन्हित कर ऐसी योजना बनाएं जहां नया शहर बसाया जा सके. औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी जमीन चिन्हित करें. मुंगेर एयरपोर्ट को भी विकसित करें. यहां ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कराएं कि रात्रि में भी आसानी से लैंडिंग हो सके. प्रस्तावित मुंगेर भागलपुर गंगा पथ परियोजना को यथासंभव एटग्रेड बनायें ताकि शहर सुरक्षा बांध के रूप में भी काम करे. एलिवेटेड कम से कम रखें. इस प्रकार से एलाइनमेंट करें कि अधिक से अधिक पथों एवं पुलों की कनेक्टिविटी हो सके.

समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित मुंगेर भागलपुर गंगा पथ (मरीन ड्राइव) परियोजना का स्थल निरीक्षण किया. मुंगेर स्थित बबुआघाट पर स्थल निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए.

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