Patna: ग्रामीण कार्य विभाग के स्तर से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत संरचना और अर्थव्यवस्था के विकास के लिए उन्नत कोटि की बारहमासी सड़कों एवं पुलों के निर्माण के साथ ही सभी बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने का काम युद्धस्तर पर जारी है. ग्रामीण कार्य विभाग के स्तर से शनिवार को अधिवेशन भवन में विभाग के सचिव दिवेश सेहरा की अध्यक्षता में विभागीय योजनाओं की प्रगति के लिए समीक्षा बैठक आयोजित की गई. जहां विभागीय कार्यों की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. बैठक में सभी कार्यों के त्वरित निष्पादन के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है.

इस क्रम में विभाग की तरफ से राज्य प्रायोजित मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना, ग्रामीण टोला निश्चय योजना, राज्य योजना (नाबार्ड), मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ नवीनीकरण एवं अनुरक्षण कार्यक्रम, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना, ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना, सुलभ संपर्कता योजना, सात निश्चय पार्ट-3 एवं केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रगति की समीक्षा की गई. उल्लेखनीय है कि सात निश्चय पार्ट-3 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का चरणबद्ध तरीके से चौड़ीकरण कर उन्हें इंटरमीडिएट लेन (5.5 मीटर) का निर्माण कराया जाना है.

इसके अंतर्गत ग्रामीण सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग और रिम्बल स्ट्रीप के निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति का भी मूल्यांकन किया गया. समीक्षा बैठक में विभाग के सचिव देवेश सेहरा इस योजना के प्रगति की समीक्षा की. सड़कों के चौड़ीकरण के लिए सरकारी भूमि की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई. ग्रामीण कार्य विभाग के स्तर से संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य में लक्षित 1 लाख 29 हजार 990 बसावटों और 1 लाख 33 हजार 675 किलोमीटर सड़क एवं 4655 पुलों के निर्माण के बदले 1 लाख 20 हजार 876 बसावट को संपर्कता प्रदान की जा चुकी है. साथ ही 1 लाख 19 हजार 915 किलोमीटर सड़क और 2750 पुलों का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया गया है. इस समीक्षा बैठक के दौरान विभाग के अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह विशेष सचिव निर्मल कुमार, विशेष सचिव मनोज कुमार, अपर सचिव संजय कुमार, अपर सचिव अभय झा, अभियंता प्रमुख जय किशोर ठाकुर के साथ सभी क्षेत्रीय पदाधिकारी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता के साथ-साथ मुख्यालय के सभी पदाधिकारी मौजूद थे. समीक्षा बैठक में विभाग के स्तर से ग्रामीण सड़कों के कायाकल्प और रखरखाव के लिए सड़क सुदृढ़ीकरण (एसएसआर), ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम और सड़कों के रखरखाव एवं मरम्मत जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की भी समीक्षा की गई. इसके अलावा निविदा प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से बैठक में ई-टेंडरिंग पोर्टल ‘ई–प्रोक 2’ का भी विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया गया.

ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम के तहत ग्रामीण सड़कों की स्थिति सुधारने और उनका बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य पुरानी और जर्जर ग्रामीण सड़कों का सुदृढ़ीकरण करना है. इस श्रेणी के तहत उन सड़कों का नवीनीकरण और चौड़ीकरण किया जा रहा है, जिनका निर्माण पूरा हो चुका है या जहां यातायात का दबाव बढ़ गया है. रखरखाव एवं मरम्मत (एमआर) के तहत  विभाग ने सड़कों की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए ‘ग्रामीण सड़क रखरखाव नीति’ बनाई है. इस नीति के तहत नई सड़कों के लिए 5 से 10 साल तक का अनिवार्य रख-रखाव का प्रावधान किया गया है.

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