Ranchi: मतदाता पंजीकरण और शुद्ध मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता की आधारशिला हैं. मतदाता सूची महज प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि वह प्रवेश द्वार है, जिसके माध्यम से नागरिक औपचारिक निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं. यह बात नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने गुरुवार को कही.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड के कार्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची 2026’ का समापन गुरुवार को NUSRL परिसर में हुआ. सम्मेलन में आईआईएम रांची, NUSRL रांची और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची नॉलेज पार्टनर रहे.
शुचिता और समावेशन में संतुलन जरूरी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. पाटिल ने कहा कि निर्वाचकीय शुचिता और निर्वाचकीय समावेशन को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्य के रूप में नहीं देखा जा सकता. जहां अपात्र व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने से रोकना जरूरी है, वहीं यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई पात्र नागरिक अनजाने या अनुचित तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित न हो.
उन्होंने कहा कि शुद्धता के साथ सुगमता, दक्षता के साथ निष्पक्षता और सत्यापन के साथ उचित प्रक्रिया निर्वाचन व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है. तकनीक और डिजिटलीकरण मतदाता पंजीकरण एवं सूची प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के अनुरूप होना चाहिए.
‘तकनीक मतदाता को सशक्त बनाए, कानून उसकी रक्षा करे’
प्रो. पाटिल ने कहा कि निर्वाचन संबंधी नवाचार का केंद्र नागरिक होना चाहिए. प्रौद्योगिकी मतदाता को सशक्त बनाए, कानून मतदाता की रक्षा करे, संस्थाएं मतदाता की सेवा करें और निर्वाचन प्रशासन मतदाता की आवाज को मजबूत करे.
उन्होंने सम्मेलन को विचार-विमर्श से आगे बढ़ाकर क्रियान्वयन की दिशा में ले जाने की जरूरत बताई. शिक्षाविदों, निर्वाचन पदाधिकारियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों से सम्मेलन के निष्कर्षों के आधार पर नए शोध, साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव और संस्थागत सहयोग विकसित करने का आह्वान किया.
SIR से लेकर AI तक पर हुआ मंथन
दो दिनों तक चले सम्मेलन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन, सूची की शुद्धता एवं समावेशिता, प्रवासन, लैंगिक मुद्दों, वंचित समुदायों, युवा सहभागिता और निर्वाचन साक्षरता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे.
प्रवासी श्रमिकों, जनजातीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों की आबादी तथा निर्वाचन प्रक्रिया से बाहर रह जाने की आशंका वाले समूहों की चुनौतियों पर भी विशेष चर्चा हुई.
तकनीकी सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और स्वचालित प्रणालियों के जरिए मतदाता सूची में विसंगतियों और दोहराव की पहचान, सूची के सतत अद्यतीकरण तथा निर्वाचन प्रक्रिया की कार्यकुशलता बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई. हालांकि विशेषज्ञों ने डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय निगरानी के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत भी रेखांकित की.
विदेशी निर्वाचन प्रणालियों से भी साझा हुए अनुभव
सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, एस्टोनिया, स्वीडन, घाना और दक्षिण अफ्रीका समेत विभिन्न देशों की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों और निर्वाचन प्रथाओं पर भी विचार हुआ. विशेषज्ञों ने कहा कि मतदाता पंजीकरण का कोई एक सार्वभौमिक मॉडल नहीं हो सकता. प्रत्येक देश की संवैधानिक, प्रशासनिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए.
रैपोर्टियर रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण को एक गतिशील और नागरिक-केंद्रित प्रक्रिया के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया, ताकि सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता कायम रखते हुए हर पात्र नागरिक की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके.
ECINET के इस्तेमाल के लिए किया प्रेरित
समापन समारोह में सेवानिवृत्त उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी-सह-राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देवदास दत्ता ने स्वागत संबोधन किया. उन्होंने सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और निर्वाचन पदाधिकारियों के योगदान की सराहना की.
दत्ता ने प्रतिभागियों को ECINET एप्लिकेशन इंस्टॉल कर उसके इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए निर्वाचन सेवाओं तक नागरिकों की आसान पहुंच बढ़ाने और निर्वाचन प्रक्रिया में उनकी सहभागिता मजबूत करने में ऐसी तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
शोध और नीति निर्माण के लिए बनेगा आधार
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड की सोलिका रानी और ऋतुपर्णा पालेई ने दो दिवसीय सम्मेलन की रैपोर्टियर रिपोर्ट प्रस्तुत की. रिपोर्ट में विभिन्न पैनल और तकनीकी सत्रों के निष्कर्षों को समाहित किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया कि शुद्ध, सुलभ और समावेशी मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता तथा निर्वाचकीय शुचिता का मूलभूत स्तंभ है. इसके लिए निर्वाचन प्राधिकारों, सरकार, न्यायपालिका, शिक्षण एवं शोध संस्थानों, नागरिक समाज, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिकों के बीच निरंतर सहयोग जरूरी है.
सेंट जेवियर्स कॉलेज के डॉ. बी. के. सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देवदास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. धीरज कुमार ठाकुर समेत बड़ी संख्या में शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्यार्थी, स्वयंसेवक, नेशनल लेवल मास्टर ट्रेनर्स और निर्वाचन विभाग के पदाधिकारी-कर्मी उपस्थित रहे.
