Patna: राज्य में मासूम बच्चों से मेहनत-मजदूरी कराने वाले सावधान हो जाएं. श्रम संसाधन विभाग ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. बिहार में 14 साल से कम आयु के बच्चों से मेहनत-मजदूरी कराने वालों के लिए छह माह से लेकर दो साल तक की जेल की सजा और 20 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
बिहार को बाल श्रम से मुक्त कराने के लिए श्रम अधिकारियों द्वारा गांवों में लोगों को जागरूक करने के लिए चौपाल का आयोजन किया जा रहा है. इसमें बाल श्रम कानून की सख्ती के संबंध में लोगों को जानकारी दी जा रही है. विभाग ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम कराने वालों पर सख्ती से कार्रवाई करने का फैसला लिया है. इसके बावजूद ईंट भट्ठों सहित होटलो, ढाबों, अपार्टमेंट्स और सामान्य घरों में बच्चों से काम कराए जा रहे हैं. ईंट भट्ठों पर काम करने वाले बाल श्रमिकों को विमुक्त कराने के लिए विशेष छापेमारी शुरू की जा रही है. इसी तरह, सामान्य घरों के साथ-साथ वैसे अपार्टमेंट को भी चिन्हित किया जा रहा है, जहां बच्चों से बाल श्रम करवाया जा रहा है. वहां से बच्चों को विमुक्त करने का अभियान चलाया जाएगा.
बच्चों से काम कराने वाले दुकानों का होगा बहिष्कार
श्रम विभाग चौपाल के माध्यम से लोगों को यह समझाया जा रहा कि ऐसे सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों का लोग बहिष्कार करें. जहां बच्चों से काम कराया जाता है. ऐसे दुकानों से कोई भी सामान की खरीद नहीं की जाए. साथ ही, उसके बारे में विभाग को जानकारी भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि कार्रवाई हो सके. स्कूली बच्चों को भी इस चौपाल से जोड़ा गया है. विभाग ने लोगों से अपील की है कि बच्चों से घरों में काम न कराएं.
बिहार के बाहर से 2976 बच्चों को कराया गया मुक्त
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक पिछले 11 वर्षों में कुल 2976 बाल श्रमिकों को देश के अन्य राज्यों से मुक्त कराया गया है. इस रेस्क्यू में सबसे अधिक बच्चे हैदराबाद, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और एमपी के विभिन्न कारखानों में काम कर रहे थे. जिन्हें मुक्त कराने के बाद उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है. वहीं, सैकड़ों बच्चों को शिक्षा से भी जोड़ा गया है. ये बच्चे बिहार सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं. इसके अलावा पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से बालश्रम उन्मूलन को गांव-गांव तक पहुचाया जा रहा है. इसके तहत प्रत्येक पंचायत में बाल अधिकार जागरूकता शिविर व बाल संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा.
मेलों व त्योहारों में चलेगा जागरूकता कार्यक्रम
बिहार के प्रमुख पारंपरिक मेलों एवं त्योहारों जैसे सोनपुर मेला, श्रावणी मेला, छठ पर्व आदि में बाल अधिकार, बाल श्रम, बाल विवाह एवं शिक्षा जैसे विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इन कार्यक्रमों के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक, लोकगीत, झांकी, पोस्टर प्रदर्शनी जैसे रचनात्मक माध्यमों से संदेशों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा. साथ ही इसके अंतर्गत सूचना बूथ, कला और शिल्प गतिविधियों, दृश्यों, व्यक्तिगत कहानियों, कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है.
