Patna: नालंदा जिले के पावपुरी थाना क्षेत्र के एनएच-20 पर शराब लदे पिकअप वाहन का पीछा करने के दौरान हुई गोलीबारी की घटना में एक्साइज इंटेलिजेंस ब्यूरो के सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले का नालंदा पुलिस ने उद्भेदन कर लिया है. इस मामले में मद्यनिषेध उपनिरीक्षक समेत कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने घटना में प्रयुक्त हथियार, वाहन और अन्य साक्ष्य भी बरामद किए हैं. गिरफ्तार आरोपी में मद्यनिषेघ उपनिरीक्षक पुष्पा कुमारी, सिपाही अनूप कुमार, होमगार्ड रिशु कुमार, दीनानाथ, सन्नी कुमार, निजी चालक गौरव उर्फ निशांत और शंकर कुमार का नाम शामिल है. तकनीकी एवं मानवीय अनुसंधान के क्रम में सामने आए तथ्यों के अनुसार, मद्यनिषेध उपनिरीक्षक पुष्पा कुमारी के आदेश पर बीएचजी जवान रिशु कुमार द्वारा फायरिंग की गई थी. इस संदर्भ में 3 राउंड फायर किए जाने एवं 2 राउंड मिस फायर होने की बात प्रकाश में आई है. अनुसंधान के दौरान घटना से संबंधित ब्लैक स्कॉर्पियो वाहन, दो मिसफायर राउंड, फायरिंग से संबंधित खोखा तथा बीएचजी जवान दीनानाथ की .303 राइफल जब्त की गई है. जब्त ब्लैक स्कॉर्पियो एवं उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों की एफएसएल (FSL) टीम से वैज्ञानिक जाँच कराई जा रही है.
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
मामले की जानकारी देते हुए नालंदा एसपी ने बताया कि 14 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे नालंदा जिला के पावपुरी पुल से दक्षिण तरफ ग्राम दौलाचक स्थित एनएच-20 पर शराब लदे पिकअप वाहन का पीछा किया जा रहा था. इसी दौरान हुई गोलीबारी की घटना में एक्साइज इंटेलिजेंस ब्यूरो के सिपाही अजीत कुमार के सिर में गोली लग गई थी. उन्हें गंभीर हालत में बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच, पटना ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना के समय मद्यनिषेध विभाग की टीम शराब लदे पिकअप वाहन का पीछा कर रही थी. पिकअप को रोकने के उद्देश्य से मद्यनिषेध उपनिरीक्षक पुष्पा कुमारी की गाड़ी गिरियक पुल पर खड़ी थी. सिपाही अजीत कुमार द्वारा बताया गया था कि पिकअप वाहन पुल के नीचे से होकर जाएगा, जिसके बाद टीम को पुल की विपरीत दिशा में जाकर नीचे की ओर बढ़ना पड़ा. तेज गति से आ रहे पिकअप वाहन का पीछा करने के क्रम में इसी दौरान एक्साइज इंटेलिजेंस ब्यूरो की धावा दल की काली स्कॉर्पियो गाड़ी बीच में आ गई और फायरिंग की घटना घटित हो गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगीर एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था. एसआईटी द्वारा तकनीकी एवं मानवीय अनुसंधान, संबंधित कर्मियों से पूछताछ, हथियार एवं एम्युनिशन की जाँच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर आरोपी क गिरफ्तार किया गया.
