Patna: प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर किशनगंज एसपी संतोष कुमार ने एससी-एसटी थानाध्यक्ष दीपू कुमार को निलंबित कर दिया है. साईबर डीएसपी के जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है.
मिली जानकारी के अनुसार किशनगंज एसपी संतोष कुमार को सूचना प्राप्त हुई कि एक परिवादिनी के द्वारा अनु० जाति/जनजाति थाना में आवेदन देने के 04 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी. मामले में संज्ञान लेते हुए एसपी ने साईबर डीएसपी से जांच कराया. जांच रिपोर्ट में बताया गया कि अनु० जाति/जनजाति थाना के थानेदार एसआई दीपू कुमार परिवादिनी के आवेदन के संदर्भ में थाना दैनिकी में कोई प्रविष्टि नहीं किया है. और न ही कोई कार्रवाई की गयी. वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर मामला दर्ज किया गया. तथा थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई गयी. जांच के क्रम में दूसरे प्रकरण में पाया गया कि गंभीर प्रकृति के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी एवं कांड के निष्पादन की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है, सिर्फ खानापूर्ति की गयी है. तीसरे प्रकरण में यह भी पाया गया कि बहुत सारे आवेदनों में समझौता लिखा गया है, जो संतोषजनक नहीं है और ऐसे कई मामलों में आवेदन प्राप्ति एवं प्राथमिकी की तिथि भिन्न पाई गई है, जो बिल्कुल नियमानुकूल नहीं है. इस प्रकार थानेदार के द्वारा आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं करने, विलंब से दर्ज करने, गंभीर प्रकृति के दर्ज मामले में नियमानुसार कार्रवाई नहीं करने सहित अन्य कई प्रकरणों में गंभीर अनियमितता बरती गयी है, जो इनके कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, मनमानेपन, स्वेच्छाचारिता, आदेशोल्लंघन, संदिग्ध आचरण के साथ-साथ विभागीय नियमों के उल्लंघन को परिलक्षित करता है, जिसके आरोप में थानेदार दीपू कुमार को तत्काल प्रभाव से जीवन यापन भत्ता पर निलंबित किया गया है तथा 07 दिनों के अन्दर उपरोक्त प्रकरण के संदर्भ में विभागीय जाँच (कार्यवाही) के विरूद्ध स्पष्टीकरण समर्पित करने का निर्देश दिया गया है.
किशनगंज पुलिस स्पष्ट करती है कि कर्तव्य के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता, उदण्डता अथवा भ्रष्ट आचरण के प्रति “शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance)” की नीति अपनायी गयी है तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी पदाधिकारी और कर्मी के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
