Patna: किसान प्राकृतिक खेती से जुड़कर फसलों को रसायन मुक्त बनाएं और मिट्टी, पानी एवं इंसानों के स्वास्थ्य को बेहतर करें. ये बातें कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने शुक्रवार को बामेती सभागार में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हो रही कार्यशाला में कही. उन्होंने कहा कि अभी जो खेती हो रही है उसमें रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. इससे मिट्टी और पानी भी दूषित हो रहा है. इसका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पर रहा है. इससे बचने के लिए हमारे पूर्वजों के समय से हो रही प्राकृतिक खेती को पुनर्जीवित करने की जरूरत है. इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें प्रयास कर रही हैं.

गोबर, कम्पोस्ट और नीम आदि से बने खाद और जैविक कीटनाशकों के इस्तेमाल से खेती की लागत भी कम होगी और स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। कृषि विभाग इसके लिए प्रोत्साहन राशि भी दे रहा है. उन्होंने किसानों से कहा कि वे प्राकृतिक तरीके से उत्पादन करें सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी, फसलों के उचित दाम दिलाने के लिए बाजार की भी व्यवस्था की जा रही है.

इस दौरान कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि रासायन और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से कैंसर जैसी घातक बीमारियां बढ़ रही है. इससे बचने के लिए लोग अपने घरों के गमले में प्राकृतिक तरीके से सब्जियां उगा रहे हैं. कीटनाशक और उर्वरक न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि खेत की मिट्टी को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. किसान इससे दूरी बनाएं. प्राकृतिक तरीके से खेती करने के लिए कृषि विभाग सहयोग कर रहा है. इससे खेती अधिक टिकाऊ और फायदेमंद बनेगी.

कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती पूरी तरह रसायन मुक्त खेती है. इसके लिए राज्य के सभी 38 जिलों में 400 क्लस्टर बनाए गए हैं, जहां प्राकृतिक तरीके से खेती हो रही है. लोगों जागरुकता के लिए प्रत्येक क्लस्टर में 2 यानि 800 कृषि सखियां चयनित की गई हैं.

किसानों को दी गई प्रोत्साहन राशि

इस मौके पर कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने प्राकृतिक खेती में अच्छा काम करने वाले किसानों और कृषि सखियों को सांकेतिक चेक दिया. यह राशि किसानों के खाते में डीबीटी के जरिए भेजी गई. इस मौके पर बड़ी संख्या में राज्य भर से आए हुए किसान और कृषि सखियां उपस्थित थीं.

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