Patna: राजधानी पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में शनिवार को आयोजित 9वें माटी-पूर्वांचल महोत्सव में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्वांचल क्षेत्र की कला, संस्कृति और सामाजिक योगदान को नई पहचान देने वाले लोगों को सम्मानित किया. इस दौरान उन्होंने बिहार के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भाषाई विविधता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की धरती ने देश और दुनिया को अनेक महान विभूतियां दी हैं. बज्जिका, मगही, मैथिली, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि की प्रतीक हैं. उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार सदियों से ज्ञान और शिक्षा का केंद्र रहा है.

मुख्यमंत्री ने बिहार और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को देश की ताकत बताते हुए कहा कि दोनों राज्य विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है. ढाई हजार सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है, 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है तथा ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि माटी महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने कहा, “माटी का फर्ज निभाना होगा और माटी का कर्ज लौटाना होगा.”

इस अवसर पर लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी, पूर्व क्रिकेटर सबा करीम, वरिष्ठ पत्रकार श्वेता सिंह, बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी ब्रजेश कुमार सिंह, पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह, चिकित्सक डॉ. राजीव रंजन, देहात संस्था के संस्थापक शशांक कुमार तथा भारतीय फुटबॉल टीम की कोच एवं उपकप्तान मधु कुमारी सहित विभिन्न क्षेत्रों की कई प्रमुख हस्तियों को ‘माटी सम्मान’ से सम्मानित किया गया.

कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, सांसद एवं माटी संस्था के संरक्षक जगदम्बिका पाल, संस्था के संयोजक आसिफ आज़मी, दानिश इकबाल समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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