Ranchi: आजादी के 79 वर्ष और झारखंड गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बावजूद रानीश्वर प्रखंड अंतर्गत गुलामशुली गांव का ‘छोटा गुलामशुली टोला’ आज भी एक-एक पक्की सड़क के लिए तरस रहा है. जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा से उबे करीब 57 आदिवासी परिवारों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है. ग्रामीणों ने ‘कुल्ही दुरुप’ (ग्राम बैठक) का आयोजन कर फैसला सुनाया कि यदि जल्द पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो वे आगामी किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे.
खाट पर अस्पताल और बारात पैदल: बदहाली की तस्वीरें
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 20 वर्ष पहले सड़क के नाम पर पुल-पुलिया और बोल्डर बिछाने का काम अधूरा छोड़ दिया गया था, जिसके बाद से किसी ने सुध नहीं ली। स्थिति इतनी खस्ताहाल है कि एंबुलेंस, चारपहिया या टोटो का गांव तक पहुंचना नामुमकिन है. किसी के बीमार पड़ने या प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीज को डेढ़ से दो किलोमीटर तक खाट पर बैठाकर ‘बड़ा गुलामशुली’ तक लाना पड़ता है. सड़क न होने से डॉक्टरों का आना भी दुश्वार है, वहीं शादी-विवाह में बारात की गाड़ियों को गांव से दूर खड़ा करना पड़ता है और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है.
सांसद और विधायक को दो-दो बार आवेदन, नतीजा सिफर
ग्रामीणों ने बताया कि दुमका सांसद नलिन सोरेन और शिकारीपाड़ा विधायक आलोक कुमार सोरेन को दो-दो बार लिखित आवेदन दिया जा चुका है. पिछले विधानसभा चुनाव में भी ग्रामीणों ने बहिष्कार का मन बनाया था, तब विधायक ने चुनाव जीतने के बाद प्राथमिकता पर सड़क निर्माण का भरोसा दिया था. हालांकि, चुनाव बीतते ही वादे ठंडे बस्ते में चले गए.
प्रशासन और सरकार से सीधी मांग
लगातार मिल रहे कोरे आश्वासनों से आहत ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सांसद और विधायक समेत जिला प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण कर पक्की सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है. बैठक में दिनेश सोरेन, गंगा टुडू, अनिल मुर्मू, लखन टुडू, धूमा मुर्मू, ठाकुर सोरेन, सोमलाल मरांडी, जसमी सोरेन, चुड़की किस्कू, सोनामुनी मरांडी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
