Patna: मुंगेर पुलिस ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र में मवेशियों के अवैध परिवहन और तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में पशु तस्करी में लिप्त गिरोह के साथ-साथ तस्करों को संरक्षण देने और लाइनर की भूमिका निभाने वाले पुलिसकर्मियों व होमगार्ड जवानों का भी खुलासा हुआ है. पुलिस ने सात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपी में खगड़िया जिले के चौथम थाना क्षेत्र के नौरंग के रहने वाले चालक अमित कुमार उर्फ मैनू, करबा निवासी उपचालक मो० जियाउल हक (उप-चालक), मुंगेर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के शंकरपुर के रहने वाले मुख्य लाइनर राकेश कुमार उर्फ घनश्याम, यातायात थाना के एएसआई अयोध्या कुमार, यातायात थाना के चालक सिपाही विमलेश कुमार, यातायात थाना के होमगार्ड अभिलेष कुमार और मुफस्सिल थाना में तैनात होमगार्ड अरविन्द यादव का नाम शामिल है. मौके पर से ट्रक (BR19GA-3676), बाईक (BR08L-4187), 7 मोबाइल, 47,000 नकद और 35 मवेशी बरामद किया है. बरामद मवेशी में से 4 मृत पाई गईं.
तकनीकी जांच में खुली पुलिसिया साठगांठ की पोल
मुंगेर एसपी ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को सूचना मिली कि एक ट्रक (BR19GA-3676) में क्रूरतापूर्वक पशुओं को लादकर NH-333B के रास्ते मुंगेर से खगड़िया ले जाया जा रहा है और एक व्यक्ति अपाचे बाईक से लाइनर का काम कर रहा है. सूचना पर मुफस्सिल थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया. छापेमारी टीम कृष्णा सेतु के पास वाहन चेकिंग अभियान के दौरान चंडिका स्थान की ओर से आ रहे एक अपाचे बाइक सवार ने भागने का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने खदेड़कर पकड़ लिया. पूछताछ में उसने अपना नाम राकेश कुमार उर्फ घनश्याम बताया. उसके पास से 42,000 नकद, बाइक और मोबाइल जब्त किया गया. कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि वह पशु तस्करों के लिए लाइनर का काम करता है.
लाइनर राकेश की निशानदेही पर चंडिका स्थान की ओर से आ रहे ट्रक को रोका गया. तलाशी के दौरान ट्रक में क्रूरतापूर्वक लादे गए 35 मवेशी (भैंस) मिले, जिनमें 04 भैंसों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी. मौके से चालक अमित कुमार उर्फ मैनू और सह-चालक मो० जियाउल हक को गिरफ्तार किया गया. चालक के पास से 4,400 तथा सह-चालक से 600 नकद व फोन बरामद हुए.
पकड़े गए लाइनर राकेश के मोबाइल की तकनीकी जांच से चौंकाने वाला खुलासा हुआ. वह मुफस्सिल थाना और यातायात थाना के कुछ अधिकारियों एवं कर्मियों के साथ लगातार संपर्क में था. कड़ाई से पूछताछ में पता चला कि यातायात थाने में पदस्थापित एएसआई अयोध्या कुमार के माध्यम से इस अवैध धंधे को संरक्षण दिया जा रहा था, जिसमें यातायात व मुफसिल थाने के अन्य सिपाही भी सहयोग कर रहे थे.
