Ranchi: बेरोजगारों को बैंकॉक भेजकर साइबर स्लेवरी कराने वाले गिरोह का मुख्य एजेंट को जमशेदपुर से रांची साईबर क्राईम थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी सरताज आलम जमशेदपुर जिले के आजादनगर थाना क्षेत्र के जाकिर नगर, रोड नं0-03 का रहने वाला है. आरोपी युवाओ को विदेश भेजकर साइबर ठगी संचालन में नियुक्त कराता था.

मिली जानकारी के अनुसार सीआईडी के अधीन रांची साईबर क्राईम थाना (काण्ड संख्या-158/25) में मामला दर्ज किया गया था. नौकरी तलाशने वाले युवकों को बैंकॉक (थाईलैंड) स्थित KK Park साइबर स्कैम कंपाउंड में मानव तस्करी कर भेजता था. वहां तस्करी के शिकार युवाओं को संगठित ऑनलाइन ठगी का काम कराता था. अनुसंधान के आधार पर आरोपी सरताज आलम को जमशेदपुर के आजादनगर थाना क्षेत्र से जमशेदपुर पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया गया. जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि गिरफ्तार आरोपी विदेश स्थित सहयोगियों के साथ साजिश कर आकर्षक विदेशी नौकरी का प्रलोभन देकर युवाओं की भर्ती करता था तथा उन्हें विदेश भेजकर साइबर ठगी जैसे निवेश घोटाले, डिजिटल अरेस्ट तथा अन्य प्रकार के साईबर ठगी संचालन में नियुक्त कराता था. मामले में अन्य पीड़ितों की पहचान, वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण एवं अंतरराज्यीय/अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य सह-अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए अनुसंधान जारी है.

झारखंड पुलिस आम नागरिको से अपील करती है कि विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर कार्यरत अनधिकृत एजेंटों से सावधान रहें. किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक पोर्टल www-cybercrime-gov-in पर दर्ज कराएं.

इस अपराध की शैली

पीडितों से unauthorised agents द्वारा संपर्क कर बैंकॉक, कंबोडिया, लाओस एवं थाईलैंड में डाटा एंट्री/अन्य नौकरियों का प्रस्ताव दिया जाता था.

वीजा एवं टिकट के नाम पर धनराशि जमा कराई जाती थी.

विदेश पहुंचने पर पीडितों को स्कैम सेंटर के संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता था.

उन्हें व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम एवं फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल/अकाउंट बनाकर संभावित विदेशी नागरिकों से संपर्क करने का निर्देश दिया जाता था.

व्हाट्सएप चौट के माध्यम से आकर्षक निवेश प्रस्ताव देकर उन्हें फर्जी निवेश ऐप/वेबसाइट के लिंक भेजे जाते थे.

पीडित विदेशी नागरिकों को विभिन्न खातों में धन जमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता था.

भारत से तस्करी कर ले जाए गए व्यक्तियों को लंबे समय तक कठोर परिस्थितियों में काम करने के लिए बाध्य किया जाता था, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता था तथा स्कैम सेंटर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी.

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