मनोज कुमार शर्मा

Patna: 2024 में झारखंड विधानसभा चुनावों में सिर्फ एक शख्‍स टाइगर जयराम महतो ने अकेले ही भाजपा की सत्‍ता वापसी के सपने को चकनाचूर कर दिया था. पहली बार चुनाव में उतरे टाइगर जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम ने सीट तो सिर्फ एक जीती लेकिन महतो कुर्मी वोटों को काट कर 14 सीटों पर भाजपा को हरवा दिया. भाजपा महज 25 सीटों पर समेट दिया. जेएलकेएम के न रहने पर भाजपा आसानी से बहुमत (41 सीटें) पा सकती थी. क्‍या बिहार में भी पहली बार जनसुराज पार्टी बना कर चुनावी समर में उतरे प्रशांत किशोर टाइगर की भूमिका निभायेंगे?

कहते हैं कि पूरे देश भर में बिहार चुनावों की प्रयोगशाला है. यहां कई बार चुनावी भविष्‍यवाणियां फेल हो चुकी हैं और जनता ने अप्रत्‍याशित परिणाम दिये हैं। यहां के वोटर अपने नब्‍ज पर किसी सर्वे वाले को हाथ नहीं रखने देते. इससे यह भी साबित होता है कि चुनावी हिंसा के लिये कभी कुख्‍यात रहे बिहार में लोकतंत्र सबसे परिष्‍कृत रूप में है.

बिहार में एक ट्रेंड सा बना हुआ है कि जदयु जिसके साथ रहेगा वो चुनाव जीत जायेगा. इस बार जदयु फिर से अपने पुराने साथी भाजपा के साथ है तो क्‍या एनडीए यह चुनाव आसानी से जीत जायेगा? 2025 के चुनावो में इस सवाल का जवाब आसानी से हां में नहीं दे सकते. क्‍योंकि चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर स्‍वयं जनसुराज पार्टी बना कर ताल ठोक रहे हैं पीके का तो दावा है कि वह या तो बहुमत लाकर सरकार बना रहे हैं या दस सीटों पर सिमट जायेंगे. हालांकि कोई भी इस बात पर विश्‍वास नहीं कर रहा कि पीके की जनसुराज अकेले बहुमत पा लेगी. लेकिन यह तय है कि वो जीतें या न जीते पर बहुमत पाने से वह एनडीए या महागठबंधन को अवश्‍य रोक सकते हैं.

प्रशांत किशोर माहिर चुनावी रणनीतिकार रहे हैं, बहुत ही वाचाल और वाकपटु हैं, विदेश में पढाई और काम कर चुके हैं, स्‍वयं बिहार से हैं जिससे उन्‍हें यहां की जमीनी सच्‍चाई पता है. वह चुनावी खेल के माहिर खिलाड़ी हैं. बहुत ही कम समय में अपनी पार्टी को खड़ा कर चुके हैं और सभी बड़ी पार्टियों से नेताओं या उनके करीबियों को अपनी पार्टी में शामिल किये हैं. वह राजद के माइ समीकरण में मुस्लिमों को भाषण दे कर रीझा रहे हैं, पढे लिखे युवाओं को अपने ओजपुर्ण भाषणों से खींच रहे हैं, मध्‍यवर्ग को आंकड़े परोस कर पिछली सरकारों की असफलता बिना रहे हैं. वहीं भाजपा जदयु के दिग्‍गजों को घेर रहे हैं. दरअसल पढे लिखे लेकिन बिहार की राजनीति को भली भांति जानने वाले प्रशांत किशोर ने अपने सारे अनुभवों को इस चुनाव में झोंक दिया है. एक नयी नवेली पार्टी अपने पहले चुनाव में ही चर्चा में है और लोग यह कयास लगा रहे हैं कि जनसुराज का क्‍या प्रदर्शन रहेगा?

प्रशांत किशोर के कुछ भाषणों और वादों पर गौर करें

वह मुस्लिम वोटरों को कहते हैं कि आप क्‍यों राजद के लालटेन में किरासन तेल बन कर जल रहे हैं?  राजद ने आपकी बदौलत सत्‍ता पाकर भी आपको अब तक क्‍या दिया? वहां लालू परिवार के अलावा किसी और के लिये कुछ भी नहीं है.

पीके कह रहे हैं के सरकारी स्‍कूलों को वह स्‍तरीय बनायेंगे। यह काम जब तक नहीं होगा तब तक बिहार के बच्‍चों को वह प्राइवेट स्‍कूलों में पढायेंगे.

किसानों के लिये वह वादा कर रहे हैं कि सत्‍ता में आने पर वह बिहार के 20 प्रतिशत जमीन पर नकदी फसल उगाने के प्‍लान पर काम करेंगे.

वह सरकार की असफलता आंकड़ों से गिनाते हैं। पीके बताते हैं कि तमिलनाडू और केरल का युवा पढने के लिये दिल्‍ली नहीं आता लेकिन दिल्‍ली के विश्‍वविद्यालय बिहार के युवाओं से भरे पड़े हैं. राज्‍य के युवा पढने के लिये भी पलायन कर रहे हैं.

पीके टीवी पर आकर बताते हैं कि कितनी शर्मनाक बात है कि देश में कहीं भी दुर्घटना में मजदूर मरता है तो वह बिहारी मजदूर होता है, अभी हालत है कि प्रधानमंत्री यहां से ट्रेन भी चलाते हैं तो वह बिहार के मजदूरों को मुंबई, दिल्‍ली ले जाने के लिये.

बेशक पीके अपने भाषणों में बहुत कुछ परोस रहे हैं और वह अपने भाषणों में सबों पर भारी भी पड़ रहे हैं, पर सिर्फ इतने से जाति पर चुनाव होने वाले बिहार में सवा सौ सीटें लाकर सरकार बनाने का उनका दावा किसी के गले नहीं उतरता. लेकिन अपने प्रभाव से पीके इतना अवश्‍य कर सकते हैं कि वह एनडीए या महागठबंधन में से किसी एक को बहुमत पाने से रोक देंगे. बिल्‍कुल झारखंड के टाइगर जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम की तरह.

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