Patna: सिम पोर्ट कर बैंक खातो से रुपये उड़ाने वाले दो सगा भाई को भोजपुर साईबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी में विकाश कुमार और उसका भाई विशाल कुमार का नाम शामिल है. आरोपी हिसुआ थाना क्षेत्र के मंझवे का रहने वाला है. आरोपी के निशानदेही पर 98,000 रू0 नगद, कार, 11 मोबाईल, एक लैपटॉप, वाईफाई राउटर, दो इलेक्ट्रोनिक मशीन, एक एलसीडी, दो एटीएम, एक आधार कार्ड, पर्श, फॉड पैसे की निकासी करते समय पहना हुआ शर्ट पुलिस ने बरामद किया है. पूछ-ताछ में आरोपी ने घटना में अपनी संलिप्तता को स्वीकार किया है. आगे बताया कि कृषि पदाधिकारी, निर्वाचन विभाग का पदाधिकारी तथा अन्य विभाग के सरकारी कर्मी बन कर एक दिन में 100 से 150 आम लोगों को कॉल करता था और सरकारी योजना का लाभ प्राप्त हो रहा है या नहीं इसके बारे में पूछता था. तब लोगों द्वारा बताया जाता था कि मुझे लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है फिर लोगों से 1900 पर उनके मोबाईल से (Port-मोबाईल नंबर) लिख कर मैसेज करवा देता था फिर उनसे पोर्ट नंबर लेकर से दिल्ली स्थिति टेलिकॉम से संबंधित एक व्यक्ति को भेजकर सिम पोर्ट कराकर श्रमजीवी एक्प्रेस ट्रेन से मांगवाता था. उसी से यूपीआई बनाकर फ्रॉड का काम करता था.
निर्वाचन विभाग के नाम पर फोन कर किया था ठगी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 9 सितंबर को सुबोध कुमार ने भोजपुर साइबर थाना में एक लिखित आवेदन दिया. जिसमें बताया गया कि मेरे मोबाईल नंबर-8092203910 पर अंजान मोबाइल नंबर-9162841691 से कॉल आया और मुझसे कहा कि मैं निर्वाचन विभाग से बोल रहा हूँ. आपका बीएलओ का काम कहां तक पहुंचा. कॉल करने वाले अंजान व्यक्ति के द्वारा मेरे मोबाईल नंबर पर ओटीपी भेजा गया और फिर उस ओटीपी की जानकारी लेकर कई बार में मेरे खाता से 3,09,922 रू0 का अवैध निकासी कर लिया गया. सुबोध कुमार के आवेदन के आधार पर भोजपुर साइबर थाना में सनहा (सं0-62/25) दर्ज किया गया. जांच के क्रम में Money Trail का अवलोकन कर केवाईसी तथा अन्य विवरणी प्राप्त किया गया और इसके आधार पर भोजपुर साइबर थाना (काण्ड सं0-54/25) में मामला दर्ज किया गया. मामले के उद्भेदन के लिए डीएसपी-सह- साईबर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. गठित टीम कार्रवाई करते हुए घटना का वैज्ञानिक एवं तकनीकी विश्लेषण तथा अनुसंधान के आधार पर पीड़ित से ठगी का रुपया जिस जिस बैंक खाता में स्थांतरित कर किया गया था. उस बैंक खातों का स्टेटमेंट के अवलोकन से ज्ञात हुआ कि संबंधित बैंक खाता में जुड़ा हुआ मोबाईल नंबर खाताधारक के पास संचालित न होकर अन्य मोबाईल में संचालित हो रहा है और उस मोबाईल नंबर से यूपीआई बनाकर पैसा का निकासी एटीएम से यूपीआई स्कैन कर किया जा रहा था. आगे अनुसंधान में पाया गया कि बैंक खातों से जुड़ा हुआ मोबाईल नंबर किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा पोर्ट कर लिया गया है. यूपीआई में प्रयुक्त सभी मोबाईल नंबरो तकनीकी अनुसंधान में पाया गया कि उक्त सभी मोबाईल नंबर 12 IMEI में संचालित हो रहे हैं. उक्त सभी IMEI नंबरों का तकनीकी रूप से निगरानी किया जा रहा था. चूंकि अपराधी काफी शातिर था. हर 1 घंटे पर मोबाईल नंबर बदल दिया करता था. इसी क्रम में मोबाईल लोकेशन के आधार पर घटना में शामिल दोनो साइबर अपराधी को नवादा जिला से गिरफ्तार किया गया.
