Patna: 30 मार्च 2025 को कुशेश्वर स्थान प्रखण्ड के बुढ़िया सुखरासी गांव को लेकर भ्रामक, निराधार और झूठी खबर प्रकाशित की गई थी. खबर प्रकाशित होने के बाद दरभंगा के जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच के आदेश बिरौल के एसडीओ व एडीपीओ को दी थी. इस जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि कुशेश्वर स्थान प्रखण्ड के पूर्वी पंचायत उजुआ सिमरटोका के बुढ़िया सुखरासी गांव के बारे में प्रकाशित खबर में जो भी तथ्य दिए गए हैं, वे सभी मन गढ़ंत और भ्रामक हैं.
बता दें कि एक मीडिया में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि इस गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि से बंदूक और हथियारों की खरीद की गई है. जब इस मामले की जांच की गई तो पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक भी आवास के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित नहीं था. ऐसे में प्रधानमंत्री योजना से मिलने वाली धनराशि से बंदूक और हथियार खरीदने की बात भ्रामक और झूठी है. इसकी पुष्टि कुशेश्वर स्थान के बीडीओ ने भी की है. उनका स्पष्ट कहना है कि पीएम आवास योजना के तहत उजुआ सिमरटोका पंचायत में एक भी घर के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित ही नहीं था. इतना ही नहीं, स्थानीय थाना से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार बुढ़िया सुखरासी गांव में दुष्कर्म और छेड़छाड़ की कोई भी घटना प्रवेदित नहीं हुई है. अत: इस गांव में दुष्कर्म और छेड़छाड़ की किसी भी घटना की पुष्टि नहीं होती है. दोनों पदाधिकारियों की रिपोर्ट में आपसी वर्चस्व की लड़ाई में काजल यादव की हत्या की पुष्टि तो की गई है. काजल यादव मूलरूप से सहरसा का रहने वाला था. उसकी हत्या में बुढ़िया सुखरासी के लोगों ने ही मुखबीर की भूमिका निभाई थी. जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोशी की उपधारा में मछली मारने को लेकर सदा परिवार और साधु यादव के लोगों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. यह मामला थाने में भी दर्ज है. इस मामले में एक माह पूर्व ही साधु यादव को गिरफ्तार करके उसे बेनीपुर जेल भेज दिया गया है.
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान समय में बुढ़िया सुखरासी में एक प्राथमिक विद्यालय अवस्थित है। इसके ऊपरी तल्ले पर बीएमपी के सात सशस्त्र जवान कैंप कर रहे हैं. इनमें एक हवलदार और छह सिपाही शामिल हैं. इस वजह से यहां के ग्रामीणों में किसी तरह के खौफ का माहौल नहीं है. इन दोनों पदाधिकारियों की जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि गांव के लोगों के पलायन करने की बात भी पूरी तरह भ्रामक है. इस गांव में सिर्फ एक ही वार्ड (वार्ड संख्या-13) है. वर्ष 2025 के वोटर लिस्ट के अनुसार यहां कुल वोटरों की संख्या 715 है. इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 350 और महिला मतदाताओं की संख्या 365 है. यहां केवल 12 ही ऐसे परिवार हैं जो इस गांव में नहीं रहते हैं. पंचायत उजुआ सिमरटोका के जन वितरण प्रणाली के विक्रेता से यहां के 135 परिवार खाद्यान्नों का उठाव कर रहे हैं. इस गांव में सदा (मुसहर) समुदाय की बहुलता है.
मीडिया में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि इस पूरे गांव के लोग पलायन कर गए हैं, जो पूरी तरह भ्रामक है. जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि बुढ़िया सुखरासी गांव में अवस्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ने अपनी एक रिपोर्ट सौंपकर बताया है कि स्कूल में प्रतिदिन औसतन 45-50 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति रहती है. उनका कहना है कि डर और खौफ से बच्चों के स्कूल नहीं आने की बात भी खबर में पूरी तरह से निराधार है. बुढ़िया सुखरासी की जांच रिपोर्ट के अनुसार यह बात सही है कि मुसहर समुदाय में जागरूकता की कमी के कारण उनके बच्चों में पढ़ाई को लेकर जागरूकता की कमी है. वैसे भी यह गांव कोशी नदी के बेसिन में बस हुआ जहां हर साल बाढ़ आती है, जिससे आवागमन के लिए रोड आदि का निर्माण नहीं हो सका है. इस गांव में पहुंचने का रास्ता भी कच्ची सड़कों से होकर गुजरता है. यह गांव पूरी तरह कोशी के दियारा क्षेत्र में पड़ता है.
