Patna: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि से संबंधित मामलों के त्वरित समाधान के लिए अधिकारियों को प्राथमिकता आधारित निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. प्रधान सचिव सीके अनिल ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं तथा अंचल अधिकारियों को पत्र जारी किया है. इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि भूमि से जुड़े मामलों में निर्धारित प्राथमिकता का हर हाल में पालन किया जाए. अनुसूचित जाति/जनजाति, विधवा, सेना में कार्यरत या सेवानिवृत्त जवान, बाहर कार्यरत सुरक्षाकर्मियों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए.
उन्होंने कहा कि फ़िफो (FIFO) व्यवस्था 30 जून 2026 तक स्थगित है, इसलिए विशेष श्रेणी के आवेदनों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है. यदि किसी स्तर पर इन निर्देशों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी.
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े. आवश्यक होने पर उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देकर उनके प्रतिनिधि या अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था की जाए, ताकि राजस्व प्रशासन अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जनहितकारी बन सके.
प्रधान सचिव द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, राज्य सरकार के सात निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत 16 दिसंबर 2025 से राज्य में “ईज ऑफ लिविंग” का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा तथा उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के जन कल्याण संवाद के दौरान यह अपेक्षा सामने आई है कि आम लोगों की भूमि से जुड़ी समस्याओं का समाधान शीघ्र हो. इसके लिए मुख्य सचिव के निर्देश पर आयोजित सोमवारीय सभा और शुक्रवारीय दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं.
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरलीकरण के उद्देश्य से गत चार महीनों में कई महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किए गए हैं तथा मामलों के निस्तारण में लागू FIFO (First In First Out) सिद्धांत को 30 जून 2026 तक स्थगित किया जा चुका है. पत्र में उल्लेख किया गया है कि 2 अप्रैल को सारण (छपरा) तथा 4 अप्रैल को मुंगेर में आयोजित जन कल्याण संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ मामलों में निर्धारित प्राथमिकता का पालन नहीं किया जा रहा है. इसे देखते हुए विभाग ने पुनः निर्देश दिया है कि कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदनों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए. इनमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आवेदक, विधवा महिलाएं, सेना में कार्यरत या सेवानिवृत्त जवान, सुरक्षाकर्मी तथा अन्य राज्यों में कार्यरत केंद्र सरकार के कर्मचारी शामिल हैं.
विभाग ने यह भी कहा है कि इन श्रेणी के लोगों के लिए हर तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना कई बार कठिन होता है. इसलिए आवश्यकतानुसार उन्हें फिजिकल अपीयरेंस से छूट देते हुए उनके प्रतिनिधि या अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति की अनुमति दी जा सकती है.
प्रधान सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे आवेदकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करते हुए उन्हें आवश्यक सहयोग और सम्मान दिया जाए. इससे सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रशासन को अधिक संवेदनशील और पारदर्शी बनाया जा सकेगा तथा लोगों को भूमि संबंधी कार्यों के लिए अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
