Patna: कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार की अध्यक्षता मेंमंगलवार को राज्य के सभी जिला कृषि पदाधिकारियों के साथ खरीफ मौसम में उर्वरक की उपलब्धता, कालाबाजारी और छापामारी की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में बताया गया कि भारत सरकार द्वारा खरीफ के लिए बिहार राज्य की उर्वरक आवश्यकता 10.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.20 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.50 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.50 लाख मीट्रिक टन एमओपी तथा 0.75 लाख मीट्रिक टन एसएसपी निर्धारित की गई है. वर्तमान समय में राज्य के किसी भी जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और 19 अगस्त तक राज्य में 1.76 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.00 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 1.91 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.54 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 0.92 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.
प्रधान सचिव ने कहा कि सरकार उर्वरक की कालाबाजारी और अधिक मूल्य पर बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है. खरीफ 2025 के दौरान अब तक 34 उर्वरक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा 214 उर्वरक प्रतिष्ठानों का प्राधिकार पत्र रद्द कर दिया गया है. किसानों को सही समय पर उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है.
प्रधान सचिव ने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जिला एवं प्रखंड स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाए. प्रखंडवार उर्वरक का उप-आवंटन स्थानीय आच्छादन एवं वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाए. इसके साथ ही उर्वरक प्रतिष्ठानों में पीओएस मशीन पर प्रदर्शित स्टॉक और वास्तविक उपलब्धता का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए.
इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर विशेष जांच दल गठित करने और नियमित छापामारी एवं निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं. अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाएगी. इस क्रम में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ समन्वय स्थापित कर उर्वरक की अवैध तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने पर बल दिया गया है.
प्रधान सचिव ने समीक्षा के दौरान कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. विभागीय निगरानी, नियमित छापामारी और कठोर कार्रवाई के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खरीफ 2025 के दौरान राज्य के किसी भी किसान को उर्वरक की कमी का सामना न करना पड़े और उन्हें समय पर, पारदर्शी तरीके उर्वरक उपलब्ध हों.
