Patna: राज्य के पैक्सों को सशक्त करने के लिए शहर के होटल पनाश कौटिल्य में चल रही दो दिवसीय कार्यशाला शुक्रवार को सम्पन्न हो गई. इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले पैक्स और अन्य समूह सरकारी सहयोग लें, लेकिन खुद को आत्मनिर्भर बनाएं. अपने आप को इतना विकसित करें कि लोग आपसे सहयोग मांगें. इस कार्यशाला को नीति आयोग ने पूर्वी भारत में किसान संगठनों का सशक्तिकरण विषय पर आयोजित किया था. इसे सहकारिता विभाग और डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीयू), पूसा के सहयोग से आयोजित किया गया था.
इसमें प्रो. रमेश चंद ने कहा कि इस कार्यशाला में बिहार सहित 9 राज्यों से आए पैक्स अध्यक्षों और अधिकारियों से पैक्स की चुनौतियों और सफल कार्यों को सुना है. सहकारिता अब एक कामयाब मॉडल बन चुका है, इससे देश-विदेश के लोग प्रेरणा ले रहे हैं. हर पैक्स को खुद को विकसित करना चाहिए.
इस मौके पर सहकारिता विभाग के निबंधक, सहयोग समितियां, रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला कई तरह से लाभदायक रही. हमें कई राज्यों के पैक्सों में हो रहे कामों को जानने का इसमें मौका मिला है. दूसरे राज्यों के पैक्सों के सफल मॉडलों को हम बिहार के पैक्सों में अपनाएंगे.
वहीं नीति आयोग की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. राका सक्सेना ने कहा कि पैक्स अब एक नए अवतार में आ गए हैं. कुछ राज्यों में पैक्सों का बहुत अच्छा मॉडल है, जिसे दूसरे राज्यों में कैसे लागू किया जाए, इस पर नीति आयोग काम करेगा.

विभिन्न राज्यों के पैक्सों ने साझा किए अपने अनुभव

इस दो दिवसीय कार्यशाला में सहकारिता क्षेत्र में देशभर के सफल प्रयोगों से सीख लेते हुए पैक्स को एक सशक्त, बहुउद्देशीय और आत्मनिर्भर आर्थिक इकाई के रूप में विकसित करने को लेकर मंथन हुआ. पैक्सों को विकसित करने को लेकर विभिन्न विशेषज्ञों ने अपनी बातें रखीं. देश के विभिन्न राज्यों में संचालित सहकारी मॉडलों और किसान संगठनों की सफल पहलों को प्रस्तुत किया गया. इस दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल सहित कुल 9 राज्यों के पैक्सों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए.

पैक्स बनेंगे वन-स्टॉप संस्थान

तकनीकी सत्र में “भविष्य के लिए तैयार पैक्स: एकीकृत ग्रामीण सेवा केंद्र” की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा हुई. इसमें कहा गया कि आने वाले समय में पैक्स ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बहुआयामी सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगे. इस दौरान पैक्सों के लिए कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता पर बल दिया गया. इस कार्यशाला के माध्यम से यह सहमति बनी कि पैक्स को स्थानीय अर्थव्यवस्था के “वन-स्टॉप संस्थान” के रूप में विकसित कर उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, वित्तीय सेवाएं और डिजिटल सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा

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