Ranchi: परिजनों के इच्छा के विरुद्ध शादी के बाद 9 वर्षों से राजस्थान में रह रही महिला को जब मायके का याद आया तो रोक न सकी. हालांकि महिला का पति इसके लिए अनुमति नही दे रहा था, फिर एक दिन बिना बताए निकल गई. जब रांची के बुंडू स्थित मायके पहुंची तो गजर बंद था. कोई परिजन नही मिला, इसके बाद महिला को एनजीओ के हवाले कर दिया गया.
क्या है मामला
रेल मदद के माध्यम से राजस्थान के भरतपुर निवासी शिकायतकर्ता करतार सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी होलिका एवं पाँच वर्षीय पुत्र यश गलती से किसी ट्रेन से रांची पहुँच गए हैं और वर्तमान में रांची रेलवे स्टेशन पर हैं. सूचना पर टीम मेरी सहेली कार्रवाई करते हुए महिला एवं बच्चे को रांची स्टेशन परिसर से सुरक्षित बरामद किया. इसकी सूचना शिकायतकर्ता को दी गई. शिकायतकर्ता ने बताया कि वह राजस्थान में हैं और अगले दिन रांची पहुँचेंगे. महिला ने पूछताछ में बताया कि वह रांची के बुंडू तमाड़ की मूल निवासी है और लगभग नौ वर्ष पूर्व अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध राजस्थान के करतार सिंह से विवाह कर वहीं रह रही थी. पति से मायके जाने की अनुमति न मिलने के कारण वह 10 अक्टूबर को अपने पुत्र के साथ घर लौटने के लिए राजस्थान से निकल गई थी. अगले दिन शिकायतकर्ता से कई बार संपर्क करने के प्रयास विफल रहे. महिला ने स्वेच्छा से अपने घर वापस जाने की इच्छा व्यक्त की, परंतु उसके पास न मोबाइल था, न परिवार का कोई संपर्क नंबर और न ही यात्रा के लिए रुपये. मामले की जानकारी राँची सहायक सुरक्षा आयुक्त को दी गई. उन्होंने महिला एवं बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह संवेदनशील एवं सराहनीय निर्णय लिया कि टीम मेरी सहेली स्वयं उक्त महिला को उसके घर तक सुरक्षित पहुँचाएगी. एनजीओ एवं बुंडू थाना पुलिस की सहायता से जब जांच की गई, तो ज्ञात हुआ कि घर पर फिलहाल कोई परिजन नहीं हैं. ऐसे में टीम मेरी सहेली ने जीआरपी रांची एवं एनजीओ बुंडू के सहयोग से महिला एवं बच्चे को सुरक्षित रूप से बुंडू थाना पुलिस के माध्यम से एनजीओ के सुपुर्द कर दिया.
