Patna: बिहार सरकार के स्तर से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए बिहार बॉयोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन नीति, 2023 को लागू किया गया था. इस नीति के माध्यम से बॉयोफ्यूल्स क्षेत्र में निवेशकों को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला, जिससे इस क्षेत्र में निवेश की गति तेज हुई है. अब इस नीति में कुछ अहम बदलाव करते हुए इसके संशोधित प्रारूप को लागू किया गया है.
बॉयो फ्यूल्स क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं एवं निवेशकों की बढ़ती रुचि को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बिहार बॉयो फ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन (संशोधन) नीति, 2025 को अधिसूचित किया है. इसके अंतर्गत निजी कंपनियों एवं तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा स्थापित की जाने वाली कम्प्रेस्ड बॉयोगैस (सीबीजी) इकाइयों के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल पर स्टेज-1 क्लीयरेंस की अंतिम तिथि 31 मार्च 2027 तथा वित्तीय स्वीकृति की अंतिम तिथि 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है.
राज्य सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि सीबीजी इकाईयों की स्थापना के लिए निजी कंपनियों एवं ओएमसी को बियाडा के निर्धारित औद्योगिक क्षेत्रों में अधिकतम 25 प्रतिशत भूमि 75,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से 30 वर्षों के लिए लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी.
औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2011 के तहत, ऐसी इकाइयां जिन्हें राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद या जिला स्तरीय सिंगल विंडो क्लीयरेंस समिति से अनुमोदन प्राप्त है. और जो कार्यरत हैं. परंतु सक्षम प्राधिकार से अनुमोदन प्राप्त नहीं कर पाई हैं. उनके 31 अगस्त 2023 तक विभागीय पोर्टल पर जमा किए गए 74 आवेदनों के अनुदान दावों का प्रस्तावित प्रोत्साहन राशि लगभग 453 करोड़ रुपये का भुगतान, संबंधित वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने के उपरांत किया जाएगा. साथ ही, इन इकाइयों को शेष अनुमेयता अवधि के लिए एसजीएसटी, वैट एवं विद्युत शुल्क की प्रतिपूर्ति भी नियमानुसार की जाएगी.
पहले आओ पहले पाओ के आधार पर प्रोत्साहन
इस योजना के अंतर्गत पहले आओ पहले पाओ के आधार पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा. लेकिन 31 मार्च 2027 तक स्टेज-1 क्लीयरेंस के लिए आवेदन करने वाली सभी कम्प्रेस्ड बॉयोगैस इकाइयां प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्र होंगी. अगर वे दिनांक-31 मार्च 2028 तक या इसके पहले वित्तीय प्रोत्साहन मंजूरी के लिए भी आवेदन कर देती हैं.
