Ranchi: झारखंड के युवाओं के साथ विदेशी नौकरी देने के नाम पर ठगी मामले में रांची साईबर क्राईम थाना पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. विदेश में आकर्षक नौकरी का लालच देकर युवाओं को म्यांमार ले जाकर उनसे ऑनलाइन साइबर ठगी करवाने वाले एक इंटरनेशनल गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. हुआ है. मूलरुप से बिहार के पटना निवासी गिरफ्तार आरोपी दाऊद अहमद को पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से मामले से जुड़े मोबाइल फोन और सिम कार्ड, पासपोर्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्य पुलिस ने बरामद किया है.
मिली जानकारी के अनुसार सीआईडी की रांची साईबर क्राईम थाना (काण्ड संख्या-158/25) में इंटरनेशनल साइबर स्लेवरी के संबंध में मामला दर्ज किया गया है. झारखंड के संभावित नौकरी तलाशने वाले युवकों को म्यांमार स्थित KK Park साइबर स्कैम कपाउंड में मानव तस्करी कर भेजने तथा वहां उन्हें संगठित ऑनलाइन ठगी गतिविधियों में जबरन संलिप्त करने से संबंधित है. जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि गिरफ्तार आरोपी विदेश स्थित सहयोगियों के साथ साजिश कर आकर्षक विदेशी नौकरी का प्रलोभन देकर युवाओं की भर्ती करता था तथा उन्हें विदेश भेजकर साइबर ठगी जैसे निवेश घोटाले, डिजिटल अरेस्ट तथा अन्य प्रकार के साईबर ठगी संचालन में नियुक्त कराता था. यह नेटवर्क झारखंड के भोले-भले नौकरी चाहने वाले युवाओं को म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड में तस्करी कर भेजता था, जहाँ पीड़ितों को संगठित ऑनलाइन धोखाधड़ी गतिविधियों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता था. गहन और विस्तृत जांच के आधार पर इस काण्ड में संलिप्त मुख्य एजेंट को मुंबई पुलिस की सहायता से आरोपी दाऊद अहमद को डोंगरी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया. दाऊद अहमद भारत और विदेशों में स्थित अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रचता था. वह युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने का लालच देकर उन्हें जाल में फंसाता था. इसके बाद वह उनकी यात्रा और विदेशी स्थानों से संचालित साइबर धोखाधड़ी केंद्रों में उनकी नियुक्ति की सुविधा प्रदान करता था. इसी मामले में पूर्व में उसके एक मुख्य सहयोगी जमशेदपुर जिले के मानगो थाना क्षेत्र के सरताज आलम को गिरफ्तार किया जा चुका है.
कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
- पीड़ितों से unauthorised agents द्वारा संपर्क कर बैंकॉक, कंबोडिया, लाओस एवं थाईलैंड में डाटा एंट्री अन्य नौकरियों का प्रस्ताव दिया जाता था.
- वीजा एवं टिकट के नाम पर धनराशि जमा कराई जाती थी.
- विदेश पहुंचने पर पीड़ितों को स्कैम सेंटर के संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता था.
- उन्हें व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम एवं फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल/अकाउंट बनाकर संभावित विदेशी नागरिकों से संपर्क करने का निर्देश दिया जाता था.
- व्हाट्सएप चैट के माध्यम से आकर्षक निवेश प्रस्ताव देकर उन्हें फर्जी निवेश ऐप वेबसाइट के लिंक भेजे जाते थे.
- पीड़ित विदेशी नागरिकों को विभिन्न खातों में घन जमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता था.
- भारत से तस्करी कर ले जाए गए व्यक्तियों को लंबे समय तक कठोर परिस्थितियों में काम करने के लिए बाध्य किया जाता था, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता था तथा स्कैम सेंटर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी.
इस अपराध शैली से बचने का तरीका :-
- विदेश में रोजगार दिलाने का झांसा देने वाले अनाधिकृत एजेंटों से सावधान रहें.
- साइबर धोखाधड़ी की किसी भी घटना की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें या आधिकारिक पोर्टल www-cybercrime.gov.in पर दर्ज करें.
