Patna: पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में गुरुवार को विकसित कृषि संकल्प अभियान का शुभारंभ किया गया. इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद होना है. इसके शुभारंभ के दिन गुरुवार को विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी.
पटना में इस अभियान का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए प्रखंड स्तर पर किसान संकल्प सभा आयोजित की जाएगी. यह अभियान सिर्फ खेतों में हरियाली बढ़ाने का ही नहीं बल्कि किसानों की खुशहाली का भी संकल्प है. सरकार विज्ञान और तकनीक के जरिए किसानों की आय को दोगुना करने का प्रयास कर रही है.
केंद्र सरकार के इस विकसित कृषि संकल्प अभियान में कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद हो रहा है. खरीफ फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, और राज्य के कृषि विभाग द्वारा 29 मई से 12 जून 2025 तक “विकसित कृषि संकल्प अभियान” शुरू किया गया है. इस अभियान के तहत किसानों को नई कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं, और अनुदानों की जानकारी दी जा रही है.

44 कृषि विज्ञान केंद्रों के 104 टीमें 4,662 गांवों में जाकर किसानों को देगी जानकारी

भारतीय कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, पटना के अंतर्गत आने वाले बिहार के 44 कृषि विज्ञान केंद्रों में 104 टीमें बनाई गई हैं. जो 4,662 विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को जानकारी देंगी. ये टीमें स्थानीय कृषि जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी के पोषक तत्वों की रूपरेखा, पानी की उपलब्धता, और वर्षा के पैटर्न का आकलन करेंगी. मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुरूप, वे उचित फसलों, उन्नत बीजों की किस्मों, आदर्श बुवाई तकनीकों, और संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह देंगी.
इस मौके पर कृषि विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि अभियान का लक्ष्य ‘लैब टू लैंड’ के विजन को धरातल पर उतारना है. इस अभियान को दो-तरफा बातचीत के रूप में डिज़ाइन किया गया है. किसान अपनी चुनौतियों को साझा करेंगे, सवाल पूछेंगे, और कीटों के संक्रमण जैसी क्षेत्रीय समस्याओं की रिपोर्ट करेंगे. जो भविष्य के शोध की दिशा में कारगर साबित होगा. इससे विज्ञान और खेती एक साथ आगे बढ़ेंगे.
विकसित कृषि संकल्प अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में गुरुवार को अटारी, पटना, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, और कृषि विज्ञान केंद्र, बाढ़ के वैज्ञानिकों द्वारा एक तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया. इस दौरान पटना जिले के करीब 150 किसानों ने अपना सक्रिय योगदान दिया.

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