Patna: बिहार सरकार का कृषि विभाग अपनी योजनाओं में महिला किसानों की भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रहा है. विभाग की कोशिश है कि विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत मिलने वाले अनुदान का लाभ महिला किसानों को भी मिले. आज राज्य में करीब एक तिहाई महिलाएं कृषि में अपना योगदान दे रही हैं. विभाग की कई योजनाओं में महिलाओं की 30 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित की गई है. इन योजनाओं में मशरूम, मखाना, पपीता और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन की योजनाएं शामिल हैं. सरकार की इस पहल से कृषि में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है.
कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, इसे इन आंकड़ों से भी समझ सकते हैं कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 86 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिल रहा है, जिनमें 26,37,646 महिलाएं शामिल हैं.
राज्य की कृषि में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से जहां एक ओर कृषि क्षेत्र का तेजी से विकास देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण भी हो रहा है. कृषि से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और सतत विकास भी सुनिश्चित हो रहा है. मशरूम जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों से लेकर प्राकृतिक खेती तक, महिलाएं अब बिहार की कृषि की मजबूत स्तंभ बन चुकी हैं.
कृषि से जुड़ी विभिन्न अनुदान योजनाओं में महिला किसानों की भागीदारी न्यूनतम 30 प्रतिशत हो, इसकी लगातार कोशिश की जा रही है. उदाहरण के लिए ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के तहत अनुदान पाने वाले कुल लाभुकों में 30 प्रतिशत महिला किसान हों, इसका प्रयास हो रहा है.
इसी तरह से एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत पपीता विकास योजना, आम एवं लीची के क्षेत्र विस्तार की योजना, राज्य योजना के तहत मुख्यमंत्री बागवानी मिशन अंतर्गत अंजीर फल विकास योजना, स्ट्रॉबेरी विकास योजना और क्लस्टर में बागवानी की योजना के तहत भी अनुदान दिया जाता है. इन सभी में अनुदान पाने वाले लाभुकों के चयन में महिला किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है.
