Patna: सीएससी की आड़ में मधेपुरा में चल रहे आधार में सेंधमारी का आर्थिक अपराध इकाई ने खुलासा किया है. आर्थिक अपराध इकाई की टीम मधेपुरा पुलिस के सहयोग से तीन आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी में मधेपुरा के रहने वाले रामप्रवेश कुमार, मिथिलेश कुमार एवं विकास कुमार का नाम शामिल है. बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की साइबर विंग ने ऐसे साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है. जो ECMP Software, UCL Source Code और ayushman.site जैसी 6-7 नकली अवैध वेबसाइट का प्रयोग कर आधार के डाटा को Modify करने, Silicon Finger Print का प्रयोग कर Identity Theft करने, आम नागरिको के अनुमति के बिना उनके बायोमैट्रिक एवं पहचान पत्र को गलत मनसा से प्राप्त कर उसका डाटा साइबर अपराधियों को बेचने एवं फर्जी दस्तावेज तैयार कर व्यापक धोखाधड़ी किया करता था. इस मामले में ईओयू ने आर्थिक अपराध थाना (काण्ड सं0-23/2025) में मामला दर्ज किया गया.

मैट्रिक पास आरोपी चला रहा था सीएससी, बनाया नकली वेबसाईट  

गिरफ्तार आरोपी राम प्रवेश ने 2021 में मैट्रिक पास कर अपना खुद का साइबर कैफे खोला. जिसका नाम राम प्रवेश टेलीकॉम रखा था. शुरुआत में साइबर कैफे में वह पैन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और अन्य फॉर्म भरने जैसे काम किया करता था. बाद में कॉमन सर्विस सेंटर का आईडी प्राप्त किया एवं अवैध गतिविधियों में लिप्त होना शुरू कर दिया. सीएससी के संचालन के क्रम में कई लोगों को बायोमैट्रिक, पहचान पत्र को प्राप्त कर गलत मंशा से एवं उनके संज्ञान के बिना फर्जी अभिलेख बनाने का काम किया करता था. रामप्रवेश ने आधार डाटा को संकलन करने के लिये कई नकली वेबसाइट बनाया, उसने YouTube और Google का उपयोग करके फर्जी UCL आधार पोर्टल बनाना सीखा। उसने एक विक्रेता से UCL Source Code खरीदा उक्त UCL Source Code का उपयोग करके, उसने ayushman.site, UCL NEHA, और UCL Aadhaar जैसी 6-7 नकली वेबसाइटें बनाई. इन वेबसाइटों का इस्तेमाल लोगों के आधार और बायोमेट्रिक डेटा को अवैध रुप से स्टोर करने के लिए किया जाता था. उसने इन वेबसाइटों को कई लोंगो को बेचा जिनके द्वारा बायोमैट्रिक डाटा का अवैध प्रयोग किया गया.

राजस्थान के कई लॉगिन आईडी का होता था उपयोग

राम प्रवेश ने विकास कुमार के माध्यम से नीतीश नामक एक व्यक्ति से संपर्क किया। नीतीश ने एनीडेस्क का उपयोग करके राम प्रवेश के लैपटॉप पर अवैध रूप से ECMP (आधार सॉफ्टवेयर) डाउनलोड किया. ECMP जो आधार से संबंधित सॉफ्टवेयर है, उसपर डाटा Modification के लिए आधार के ऑपरेटर का बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन चाहिए होता है. और ऑपरेटर के मोबाईल पर OTP आता हैं. ECMP लॉगिन आई०डी० प्राप्तकर्ताओं की मिलीभगत से रामप्रवेश ने बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिये सिलिकॉन फिंगर प्रिंट (नकली फिंगरप्रिंट) बनाया जिससे ECMP को एक्सेस करना आसान हो गया. उनकी सहमति से ECMP को लॉगिन करने के लिये रामप्रवेश राजस्थान के कई लॉगिन आईडी का उपयोग करता था. एवं आधार सिस्टम को बाईपास करते हुये लोगो के आधार में संशोधन करता था. रामप्रवेश और उसके सहयोगी आम नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभदिलाने के नाम पर झांसा देकर उनसे बायोमैट्रिक एवं उनके पहचान पत्र की प्रतियों प्राप्त करता था एवं डाटा का संकलन पश्चात् वेबसाईट में सेव कर विभिन्न साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता था. आधार सुरक्षा में सेंधमारी कर साइबर अपराध में डाटा प्रयोग किया जाता है. आधार प्रणाली में जो कमियों पायी गयी हैं उससे संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन UIDAI को दी जाएगी. इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों और नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है.

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