Patna: “आपदा प्रभावित लोगों को त्वरित राहत देने और बचाव कार्य के लिए आपदा प्रबंधन विभाग राज्य के सभी जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधा-सह-प्रशिक्षण केंद्र (ईआरएफ-टीसी) का निर्माण कर रहा है. अभी तक चिन्हित 18 में से 17 में भवन निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि पटना में कार्य प्रगति पर है. बाकी के 20 जिलों में भी विभागों के समन्वय निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाएगा.” यह बात बुधवार को सूचना भवन के संवाद कक्ष में पत्रकारों को संबोधित करते हुए विभाग के संयुक्त सचिव मो नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने कही. उन्होंने कहा कि राज्य के 17 जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधा-सह-प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. यहां एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीम तैनात कर दी गई है. पटना में इस केंद्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है. बाकी के जिलों में भी विभागों से समन्वय स्थापित कर ईआरएफ-टीसी का निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाएगा.

संयुक्त सचिव ने कहा कि ईआरएफ-टीसी पर तैनात एसडीआरएफ के जवान किसी भी आपदा की स्थिति में लोगों को त्वरित बचाव कार्यों से राहत देंगे और संगठनों को आपदा बचाव के लिए प्रशिक्षित करेंगे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष से बाढ़ आश्रय स्थल का निर्माण किया जा रहा है. इसके तहत 10 अति प्रभावित बाढ़ प्रभावित जिलों में 100 स्थायी स्थाई बाढ़ आश्रय स्थल निर्माण का लक्ष्य निर्धारित है. इसमें अभी तक 96 आश्रय स्थलों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. बाकी के आश्रय स्थल भी जल्द बना लिए जाएंगे.

संयुक्त सचिव ने कहा कि बाढ़ग्रस्त जिलों में प्रभावित परिवार को अब छह हजार की बजाय सात हजार रुपए बतौर आनुग्राहिक (जीआर) राहत दी जा रही है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में नौ लाख 71 हजार 678 परिवारों को प्रति परिवार सात हजार रुपए के हिसाब से 680.17 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया. उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में सुरक्षा शनिवार कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को आपदा से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. नदियों और जलाशयों में डूबकर मरने वाले लोगों की संख्या में वर्ष 2030 तक 50 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित है. इसके लिए 6-10 और 11-18 वर्ष आयु के बच्चों व किशोरों के लिए सुरक्षित तैराकी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है.

शीतलहर में बचाव के लिए 130 रैन बसेरों की स्थापना, 38 हजार लोगों को राहत

संयुक्त सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में शीतलहर और ठंड के प्रकोप से बचाव के लिए राज्य भर में 130 रैन बसेरे बनाए गए. इन रैन बसेरों में 38 हजार 700 लोगों ने ठहराव किया. साथ ही करीब 80 हजार गरीबों में विभाग ने कंबल बंटवाए. विभाग की बचाव संबंधी तैयारियों का ही परिणाम है कि इस वर्ष ठंड से मरने वालों की संख्या अभी तक शून्य है. अन्य प्रमुख बिंदु जिस पर आपदा प्रबंधन विभाग ने बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), विकास प्रबंधन संस्थान (DMI) के आपदा प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र (CoEDM) तथा नागरिक सुरक्षा के सहयोग से इस वर्ष कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाएः

  • डूबने से होने वाली मौतों में कमी लाने के लिए संवेदीकरण और मॉकड्रिल का आयोजन.
  • आपदा प्रबंधन पर 5 जिलों के 483 ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य समन्वयकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण.
  • आपदा प्रबंधन के दो दिवसीय कार्यक्रम में 2241 आंगनबाड़ी सेविकाओं का प्रशिक्षण.
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण आकस्मिक प्रबंधन प्रशिक्षण में 482 स्वास्थ्य कर्मियों की सहभागिता.
  • आग से बचाव के लिए पांच हजार श्रमिकों में जागरुकता अभियान.
  • तैराकी कार्यक्रम के तहत 16 हजार 374 युवक और युवतियों का प्रशिक्षण.
  • राज्य के 67 प्रखंडों में एक हजार 745 राजमिस्त्रियों का प्रशिक्षण.
  • वर्ष 2025 में SDRF द्वारा 159 सामुदायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से 26 हजार से अधिक लोगों को आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षित किया गया.
  • इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की आपदाओं के प्रति छात्रों को जागरूक एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से 148 विद्यालयों में विद्यालय सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कुल 31 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया गया.
  • सिविल डिफेंस के तहत राज्य भर में प्रशिक्षण कार्यशालाएं, संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आपदा मित्रों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है.

उक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संदीप कुमार, उप सचिव पंकज कुमार कमल, अवर सचिव अजय ब्रह्मानन्द, सहायक निदेशक (सूचना एवं जनसंपर्क) अमन कुमार आकाश सहित अन्य पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे.

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