Ranchi: साइबर अपराध में 11 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा पुलिस ने किया है. गिरफ्तार आरोपी के माध्यम से 11 करोड़ की ठगी हुई है. जामताड़ा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मास्टमाइंड समेत आधा दर्जन आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस इस गिरोह पर एक महीने कड़ी नजर रख रही थी. गिरफ्तार आरोपी में गिरीडीह जीप के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के बांकीकला के रहने वाले मो मेंहबुब आलम उर्फ डीके बॉस, सफाउद्दीन अंसारी, मो आरीफ अंसारी उर्फ डीके बॉस, लखनपुर के रहने वाले मो जसीम अंसारी, गांडेय थाना क्षेत्र के महजोरी निवासी शेख बेलाल उर्फ डीके बॉस और जामताड़ा जिले के करमाटांड़ थाना क्षेत्र के सियाटांड़ निवासी अजय मंडल का नाम शामिल है. आरोपी के निशानदेही पर 14 मोबाईल, 23 सिम कॉर्ड, 10 एटीएम कार्ड, 1 लैपटॉप, 2 चार पहिया वाहन, 1 डीएसएलआर कैमरा, 1 ड्रोन कैमरा और 108800 रुपये नकद पुलिस ने बरामद किया है. जामताड़ा एसपी डॉ० एहतेशाम वकारिब साईबर अपराध के रोकथाम एवं उनपर अंकुश लगाने व मास्टर माइन्ड के गिरफ्तारी के लिए परिक्ष्यमान आईपीएस राघवेन्द्र शर्मा, परिक्ष्यमान डीएसपी चन्द्रशेखर, तथा साईबर अपराध थाना में पदास्थापित इंस्पेक्टर जयन्त तिर्की, डी के वर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया. रविवार को घटना की जानकारी देते हुए सपा ने बताया कि जामताड़ा पुलिस ने संगठित तरीके से साइबर अपराध करने वाले एक अत्याधुनिक आपराधिक गिरोह को गिरफ्तार किया है. एक महीने से अधिक समय तक कड़ी निगरानी करने के बाद गिरफ्तारी की गई. यह साईबर अपराधी गिरोह “पीएम किशन योजना एपीके”, “पीएम फसल बीमा योजना. एपीके” और विभिन्न भारतीय बैंकों जैसे भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक, एनपीसीआई इंटरनेशनल आदि के नाम से फर्जी मोबाइल एपीके (एप्लीकेशन) बनाते थे. इन एपीके को व्हाट्सएप के माध्यम से आम नागरिकों को भेजा जाता था, जो इसे अपने फोन पर डाउनलोड कर लेते थे. इसके बाद उनके फोन हैक हो जाते थे. इनके द्वारा एपीके को अन्य साइबर अपराधियों को 20-25 हजार रुपये प्रति एपीके के हिसाब से बेचा जाता है. फोन को हैक करने और एसएमएस, कॉल फॉरवर्डिंग का उपयोग करके बैंक खाता विवरण, ओटीपी, जन्म तिथि चुराने की क्षमता थी. जिसका उपयोग भोले-भाले पीड़ितों के बैंक खाते में अनधिकृत लेनदेन करने के लिए किया जाता था. “डीके बॉस” के छद्म नाम से काम कर रहे थे और उनके फर्जी एपीके अन्य साइबर अपराधियों के बीच लोकप्रिय थे जो एपीके आधारित धोखाधड़ी करते थे. छापेमारी के दौरान गिरफ्तार आरोपी के फोन से 100 से अधिक ऐसे फर्जी मोबाइल एपीके बरामद किया गया है. पुलिस को इस गिरोह को एक फर्जी केंद्रीकृत पैनल भी मिला, जो हजारों पीड़ितों के एसएमएस देख सकता था. गिरोह के पास से लगभग 2700 पीड़ितों का डेटा, जिसमें पीड़ितों के फोन से लगभग 2.5 लाख संदेश शामिल हैं, जिसमें व्हाट्सएप ओटीपी, फोनपे लॉगिन ओटीपी, बैंकिंग लेनदेन आदि शामिल हैं, आरोपियों द्वारा बनाई गई वेबसाइट से बरामद किया गया. जप्त मोबाईल फोन में लगभग 2000 पंजाब नेशनल बैंक और 500 केनरा बैंक खाताधारकों का डेटा पाया गया. इसका इस्तेमाल बैंक के ग्राहकों को निशाना बनाने के लिए किया जाता था. गिरफ्तार साइबर अपराधी एंड्रॉइड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के विशेषज्ञ हैं और मैलवेयर डेवलपमेंट के लिए बैटजीपीटी का इस्तेमाल करते थे.
ये शातिर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल करता था. मामले की गंभीरता के मद्देनजर झारखंड सीआईडी तकनीकी सहायता टीम और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से भी सहायता मांगी है. 14सी के समन्वय पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तार अपराधी देशभर में 415 से अधिक साइबर अपराध कांडो, शिकायतों से जुड़े हैं, जिनमें करीब ग्यारह करोड़ रूपये के धोखाधड़ी के मामले में शामिल हैं. इस संबंध में इनके विरुद्ध जामताड़ा साईबर अपराध थाना (कांड सं0-07/25) में मामला दर्ज किया गया है.

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