Ranchi: राजधानी रांची के कांके थाना क्षेत्र में एक आदिवासी महिला की जमीन से जुड़े मामले को लेकर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने वाली सुभाषो देवी ने कांके थाना प्रभारी पर आरोप लगाया है कि समाप्त हो चुकी धारा 163 बीएनएसएस की कार्रवाई के बावजूद भू-माफियाओं को संरक्षण देकर नियमों के विरुद्ध उनका काम बंद कराया गया और उनके आवेदन की अनदेखी कर एकपक्षीय कार्रवाई की गई. इसे लेकर सुभाषो देवी ने डीजीपी, एसएसपी, आईजी व डीआईजी से शिकायत की है.
पीड़िता के अनुसार, मौजा हुसीर स्थित उनकी पैतृक भूमि, जिसका आरएस खतियान और पंजी-II में विधिवत दर्ज रिकॉर्ड मौजूद है, पर लंबे समय से भू-माफियाओं की नजर है. सुभाषो देवी का कहना है कि फर्जी कागजात के आधार पर जमीन हड़पने के प्रयास किए गए, जिसकी शिकायत उन्होंने पहले ही अंचल पदाधिकारी कांके और थाना प्रभारी को दी थी. इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय धारा 163 बीएनएसएस के तहत अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में वाद (एम-3532/2025) चलाया गया, जिसकी कार्रवाई 22 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुकी है.
आरोप है कि कार्रवाई समाप्त होने के बाद 26 जनवरी 2026 को जब सुभाषो देवी अपनी जमीन पर काम करा रही थीं, तभी कथित भू-माफियाओं ने मौके पर पहुंचकर हमला किया और जातिसूचक गालियां दीं. इस संबंध में उन्होंने कांके थाना और एससी-एसटी थाना में लिखित आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई. इसके विपरीत, उनके पक्ष के लोगों के खिलाफ कांके थाना कांड संख्या 23/2026 के तहत एफआईआर दर्ज कर परेशान किया जा रहा है.
बिना किसी वैध आदेश के काम रुकवाने पहुंची पुलिस
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि 26 जनवरी को बिना किसी वैध न्यायालयी आदेश या लंबित वाद के बावजूद पुलिस ने काम रुकवा दिया. उनका कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह मनमानी, दुर्भावनापूर्ण और एकतरफा है, जिससे भू-माफियाओं को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया गया.
