Patna: बिहार के युवाओं और बच्चों के लिए खेल को करियर के रूप में अपनाने की राह में कल तक सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और लैंगिक पूर्वाग्रह जैसी कई बाधाएं हुआ करती थी. लेकिन आज तस्वीर बदली-बदली सी नजर आती है. खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2025 को लेकर बेगूसराय के न केवल युवाओं और बच्चों में बल्कि वरिष्ठ नागरिकों में भी गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है. हो भी क्यों न! खेलो इंडिया यूथ गेम्स में यहां फुटबॉल का जोर और शोर जो है.
खेलो इंडिया यूथ गेम्स में फुटबॉल के सभी मुकाबले बेगूसराय के दो स्टेडियम में बरौनी खेलगांव स्थित यमुना भगत स्टेडियम और बरौनी रिफायनरी टाउनशिप स्टेडियम में खेले जा रहे हैं. यहां झारखंड बालिका टीम ने अभी-अभी तमिलनाडु की लड़कियों को 2-1 से पराजित कर अपनी जीत का जश्न मना रही हैं. यहां हमारी मुलाकात झारखंड बालिका टीम की मुख्य कोच बीना करकेटा से होती है.
बीना अपनी खिलाड़ियों को अगले मैच की तैयारी को लेकर टिप्स दे रही थी. जब उनसे पूछा जाता है कि आपको बेगूसराय का वेन्यू कैसा लगा. बीना बोल पड़ती हैं कि जब बिहार और झारखंड एक हुआ करता था. तब मैंने अपने फुटबॉल कैरियर में बेगूसराय के जमुना भगत स्टेडियम में कई मैच खेले हैं. लेकिन आज स्टेडियम का रंग-रूप पूरी तरह बदल चुका है. यकीन नहीं हो रहा है कि यह वही बेगूसराय है. जहां खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव हुआ करता था. मैंने लगातार कई सालों तक बिहार की महिला फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया है. आज जमुना भगत स्टेडियम और यहां खिलाड़ियों के लिए उपलध सुविधाएं देख अभिभूत हूं. उन्होंने कहा, तब हमारी सरकार खेल को खेल की तरह लेती थी. लेकिन आज यहां खेल का गौरव एक बार लौट आया है. अगर यह सिलसिला जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार से एक बार फिर मेवालाल, सी प्रसाद और ललन दुबे जैसे फुटबॉल खिलाड़ी न केवल राष्ट्रीय फलक पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय फलक पर सितारे की तरह जगमगाते नजर आएंगे.
जब बच्चों को उनके गांव और शहर में इस तरह की खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो उनकी प्रतिभा खुद ब खुद निखरकर दुनिया के सामने आएंगी. इसी जगह तमिलनाडु बालिका फुटबॉल टीम की कोच कला वेंकट स्वामी मिलती हैं. हालांकि झारखंड के हाथों 2-1 से मिली पराजय से वह थोड़ी उदास दिखती हैं. लेकिन जब बेगूसराय की मेजबानी और यहां उपलब्ध खेल सुविधाओं के बारे में उनसे पूछा जाता है तो उनकी आँखें चमक उठती हैं और बोलती हैं- एक्सीलेंट. यहां फुटबॉल की सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसके लिए वह बिहार सरकार और खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देती हैं और कहती हैं, हमें बिहार के बारे में जितना सुने और पढ़े थे. उससे कई गुणा बेहतर पाया है. मैं पहली बार बिहार आई हूं. अब मैं बार-बार बिहार आना चाहूंगी. मुझे बिहार के ऐतिहासिक धरोहरों के भी दर्शन करने हैं.
बेगूसराय के बरौनी खेलगांव स्थित यमुना भगत स्टेडियम के साथ बरौनी रिफायनरी टाउनशिप स्टेडियम में भी फुटबॉल के मुकाबले खेले जा रहे हैं. 5 से 14 मई तक सुबह और शाम दो शिफ्ट में आठ राज्यों की बालिका और आठ राज्यों के बालकों की टीम यहां मैदान में हैं. स्टेडियम के एक कोने में अपनी सात वर्षीया बेटी के साथ फुटबॉल का आनंद ले रहे पंकज कुमार सिंह बताते हैं कि अब बेगूसराय में खेल का माहौल बनने लगा है. यहां के दोनों स्टेडियम में सुबह-शाम युवा और बाल खिलाड़ियों का जमघट लगता है. मैं भी अपनी बेटी में खेल के प्रति रुचि जगाने के लिए उसे फुटबॉल का मैच दिखाने लाया हूं. अगर खेलों में इसकी रुचि रही तो इसे मैं एक सफल खिलाड़ी के रूप में देखना चाहूंगा. क्योंकि हमारी सरकार अब खिलाड़ियों के पीछे एक अभिभावक की तरह खड़ी है. पढ़ाई की तरह ही बच्चों के सामने अब खेल को भी कैरियर बनाने का विकल्प है. पदक जितने पर उनके लिए नौकरी की भी यहां व्यवस्था हो चुकी है.
कहते हैं न, खेल सिर्फ हार-जीत का मुकाबला भर नहीं है. यह खिलाड़ियों के खून में एक संस्कार बनकर दौड़ता है. जब खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं तो अभिभावक अपने बच्चों में चैम्पियन ढूंढना शुरू कर देते हैं. और तब शुरू होता है गांव की मिट्टी से चैम्पियन के जन्म लेने का सिलसिला.
बिहार का खेल इतिहास गवाह है कि हमारी मिट्टी ने ही मेवालाल और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान व अर्जुन अवार्डी सी प्रसाद को पैदा किया था. आज महज 14 वर्ष की उम्र में ही वैभव सूर्यवंशी जैसा किशोर आईपीएल जैसी दुनिया की सबसे प्रोफेशनल क्रिकेट लीग के मैदान में अपनी प्रतिभा, अपने हौसले और कभी हार न मानने वाले जज़्बे के साथ दुनिया के सामने है.
