Patna: इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल किला परिसर में आयोजित छह दिवसीय भारत पर्व महोत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया. इस दौरान यहाँ प्रदर्शित की गई बिहार की झांकी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही. सुपर फ़ूड मखाना को केंद्र में रखकर बनाई गई इस झांकी को लोगों ने खूब सराहा और उत्साह में जमकर सेल्फी भी ली. आज मखाना बिहार की नई पहचान बनकर उभर रहा है.
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की तरफ से आयोजित भारत पर्व का यह प्रतिष्ठित आयोजन भारतीय संस्कृति, विरासत और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय मंच देने का अवसर माना जाता है. ऐसे मंच पर मखाना की मौजूदगी यह संकेत देती है कि बिहार का पारंपरिक उत्पाद अब केवल रसोई या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह वैश्विक सुपरफूड के रूप में उभर चुका है.
मिथिला की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा मखाना आज न्यूट्रिशन, मेडिसिन और इंटरनेशनल फूड मार्केट में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और मिनरल्स से भरपूर यह उत्पाद स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नई पीढ़ी की पहली पसंद बनता जा रहा है. यही कारण है कि ‘सुपर फूड’ की श्रेणी में मखाना की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हो रही है.
मखाना उत्पादन का गढ़ बना बिहार
भारत में होने वाले कुल मखाना उत्पादन का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिहार से आता है. दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया जैसे जिले इसके प्रमुख उत्पादन केंद्र हैं. वर्ष 2012 तक जहां राज्य में लगभग 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 35 हजार 224 हेक्टेयर से अधिक हो चुकी है.
राज्य सरकार की योजनाओं विशेष रूप से मुख्यमंत्री बागवानी मिशन और मखाना विकास योजना (2019-20) ने इस क्षेत्र को नई गति दी है. “स्वर्ण वैदेही” और “सबौर मखाना-1” जैसे उन्नत प्रभेदों के प्रोत्साहन से उत्पादन 56 हजार टन के पार पहुंच चुका है. इसका सीधा असर किसानों की आय और राज्य की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है. वर्ष 2005 में जहां मखाना/मत्स्य जलकरों से राज्य को 3.83 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था. वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 17.52 करोड़ रुपये हो गया है.
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड से खुले नए अवसर
केंद्र सरकार के स्तर से राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन से मखाना किसानों और उद्योग के बीच एक मजबूत वैल्यू चेन बनने की उम्मीद है. बोर्ड का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग और निर्यात को संगठित रूप देना है. इससे किसानों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग की आसान उपलब्धता सुनिश्चित होगी.
दरभंगा को मखाना प्रशिक्षण हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां अब मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों के किसान भी तकनीकी प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं. यह दर्शाता है कि मखाना के क्षेत्र में बिहार अब राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है.
अमेरिका सहित वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग
बिहार का मखाना आज अमेरिकी बाजार में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. ग्लूटेन-मुक्त, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण इसे नट्स और पॉपकॉर्न के स्वस्थ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. जीआई टैग ने इसकी गुणवत्ता और प्रामाणिकता को प्रमाणित किया है, जिससे अमेरिका सहित कई देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. मखाना अब पारंपरिक भारतीय उत्पाद से आगे बढ़कर वैश्विक सुपरफूड के रूप में स्थापित हो रहा है.
